Friday, December 4, 2020

IIT इंजीनियरिंग के बाद दोनों दोस्तों ने खेती शुरू किया, केवल छत पर उगा रहे हैं 7-8 क्विन्टल सब्जियां : Khetify

हमारे बड़े बुजुर्ग कहा करते थे कि अगर खेती करो तो खुद के द्वारा बनाए गए खादों से। लेकिन जैसे-जैसे आधुनिकीकरण बढ़ा लोग बजारों से रसायनिक खाद खरीद कर खेतों में डालने लगे। जिससे उपज तो अच्छी होने लगी लेकिन बीमारियां बढ़ने लगी। इस कारण अब इसका प्रचलन धीरे-धीरे अस्त-व्यस्त होते नजर आ रहा है। हमारे देश के बहुत से व्यक्ति जो अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर जैविक खेती कर रहे हैं वह अपनों के लिए यह बहुत ही कारगर सिद्ध हो रहा है।

आज हम आपको ऐसे दो किसानों के बारे में बताएंगे जो अपनी इंजीनियर की नौकरी छोड़ अपने छत पर खेती करने का निश्चय लिए और आज ये अपने छत पर लगभग 700 से 800 किलोग्राम सब्जियां उगा रहे हैं। तो चलिए पढ़ते हैं इन दोनों दोस्तों के बारे में कि इन्होंने किस विधि से इतनी अधिक मात्रा में छत पर सब्जियों को उगाया है।

ये हैं कौस्तुभ खरे और साहिल पारिख

कैस्तुभ खरे(Kaustubh Khare) और साहिल पारिख(Sahil Parikh) दोनों मित्र IIT(भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) खड़गपुर(Kharagpur) से इंजीनियरिंग(Engineering) की है। जाहिर सी बात है कि अगर ये शिक्षित हैं तो ये खेती भी ऐसे विधि से करेंगे जिससे कम जगह में अच्छी खासी पैदावार हो सके और उसे खाने से हमारा शरीर स्वस्थ रहे। अक्सर लोग यह मानते हैं कि अगर खेती करना है तो ज्यादा जमीन की जरूरत है। लेकिन इन दोनों मित्रों ने अपने छत पर ही खेती कर लगभग 700 से 800 किलोग्राम सब्जियां उगाई है।


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छत पर किया खेती का कार्य

इन दोनों मित्रों ने अपने कौशल और शिक्षण के आधार पर अपने छत पर ही खेती करना शुरू किया और लोगों के मन के इस अभाव को भी मिटा दिया कि खेती के लिए ज्यादा जमीन की आवश्यकता है और गांव में रहकर हीं खेती हो सकती है। कौस्तुभ और साहिल दोनों मित्र उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो चाहते हैं कि खेती करें लेकिन जमीन के अभाव के कारण नहीं कर पाते। ये लोग इन दोनों मित्रों से बहुत कुछ सीख सकते हैं और कम जगह में ही खेती कर, खुद का स्वास्थ्य सुरक्षित रख सकते हैं।

किस तकनीक के माध्यम से करतें हैं खेती

आइए जानते हैं कि यह दोनों मित्र किस तकनीक को अपनाकर खेती कर रहे हैं कि इन्हें ज्यादा फायदा हो रहा है। ये दोनों मित्र खेती के लिए हाइड्रोपोनिक विधि को अपना रहे हैं और छत पर सब्जियों को उगा रहे हैं। हाइड्रोपोनिक्स विधि से खेती करने में मिट्टी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह खेती पानी के माध्यम से किया जाता है। इन्होंने हाइड्रोपोनिक विधि इसलिए अपनाया क्योंकि अगर अन्य खेतीं करें तो मिट्टी चाहिए और मिट्टी ज्यादा रहेगी तो छत पर भार होगा, इससे इन्हें समस्या हो सकती है। हाइड्रोपोनिक्स विधि से खेती के लिए सबसे पहले तो इन्होंने क्यारी बनाई फिर उनमें पौधों को लगाया। क्यारी बनाने से एक फायदा होता है कि छत पर पानी नहीं गिरता है जिसे छत सुरक्षित रहता है। इस तकनीक के माध्यम से पानी में ऐसे पौधों के लिए उर्वरक डाले जाते हैं जो उनके जड़ों तक पहुंच कर उन्हें अच्छी पैदावार के लिए तैयार करते हैं।

हुई अच्छी पैदावार

छत पर खेती करने का फैसला इनका सफल हुआ और यह आज अपने खाने के लिए सब्जियां खुद उगा रहे हैं। साथ ही इसका लाभ उठा रहे हैं। यह सब्जियों के तौर पर अपनी छत पर पालक, मेथी, बैंगन, टमाटर, भिंडी, पोई साग और मिर्च आदि लगाए हैं। यह इस खेत से लगभग 700 से 800 किलोग्राम सब्जियां उगा रहे हैं। इन्होंने मात्र 2 हजार से खेती की शुरूआत की और आज लाखों कमा रहे है।

‘खेतीफाई’ नाम से कम्पनी की स्थापना

साहिल और कौस्तुभ दोनों मित्रों ने अपने खेती के कार्य को “खेतीफाई” नाम दिया है। इस के माध्यम से यह खुद अपने छत पर खेती तो करते ही हैं साथ हीं दूसरों को भी इसके बारे में जानकारी देते हैं। खेतीफाई का आयोजन विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और कार्यालयों में किया जा रहा है। खेतीफाई की टीम लोगों को खाद का प्रयोग कर अपने लिए भोजन का उत्पादन करना सिखाती है। खेतीफाई का उद्देश्य बच्चों को पौधों की पहचान, बीजों की पहचान और पोषण युक्त भोजन के बारे में बताने का है।

अगर आप भी खेतीफाई की टीम से बात करना चाहते हैं तो 07011043163 पर कॉल करके जानकारी ले सकतें हैं, और फेसबुक प्रोफ़ाइल से जुड़ सकते है।
Email:- [email protected]

IIT करने के बाद इन्होंने खेती को चुना और जिस तरह दोनों मित्र खेती कर रहें हैं और इसके गुर दूसरों को बता रहे हैं। इसके लिए The Logically कौस्तुभ खरे और साहिल पारिख की प्रशंसा करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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