Wednesday, October 21, 2020

फ्रिज़ से लेकर हॉट-पॉट, सभी बर्तन होते हैं मिट्टी से तैयार, अनेकों फायदे वाले देशी बर्तन आपको यहां मिलेंगे

अगर आप चाय के शौक़ीन होंगे तो कुल्हड़ में चाय ज़रूर पिए होंगे. या मिट्टी वाले छोटे छोटे प्लेट में बर्फ वाली आइस्क्रीम खाए होंगे. ये भी नहीं किए तो कभी न कभी मटके का पानी तो ज़रूर पिए होंगे. अलग ही स्वाद रहता है. अच्छा आपने कभी सोचा है?? हमारे पूर्वज इतने स्वस्थ कैसे रहते थे? वह इतनी लंबी उम्र की जीवनशैली कैसे जीते थे?? यह तो जानते ही होंगे.. वे अत्यधिक वर्षों तक जीवित रहते थे। लेकिन कैसे?? शायद इतने सारे प्रश्नों का जवाब ढूंढना आज की पीढ़ी जरूरी नहीं समझती। आज के भागदौड़ भरी जिंदगी में समय निकालना बहुत ही मुश्किल हो गया है। इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि उसके पास ख़ुद के लिए भी समय नहीं है तो ये सब फिजूल की बातों का जवाब कहां से ढूंढे। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि हमारे पूर्वज कैसे इतनी बेहतरीन जिंदगी आनंदमय व्यतीत करते थे। हमारे पूर्वज गोबर की खाद से उगाएं गए अनाज, फल और सब्जियों का सेवन किया करते थे। मिट्टी, तांबे और पीतल के बर्तनों में खाना बनाया और इसी में खाया भी करते थे। मिट्टी के बर्तनों से किसी प्रकार की हानि नहीं होती। यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। अगर मिट्टी के बर्तनों से पानी पिया जाए तो वह पानी काफी शीतल और पीने में स्वादिष्ट लगता है। आज भी कई ऐसे व्यक्ति है जो मिट्टी के बर्तनों का निर्माण करते हैं और कुछ लोग इसका उपयोग भी करते हैं। यह आश्चर्यजनक है कि मिट्टी के बर्तन के साथ यह शख्स कूलर, फ्रीज, केतली, और हांडी भी बना रहे हैं। आइये पढ़ते हैं मिट्टी के पात्र कहां से और किनसे ऑनलाइन खरीदें।

स्वास्थ्य के लिए क्या है लाभदायक ?

आधुनिक युग में हर व्यक्ति सुखमय, आरामदायक और स्टाइलिश जीवन जीने की उम्मीद से किसी भी पुराने समय के सामानों का उपयोग बहुत ही कम मात्रा में कर रहा है। बात अगर बर्तनों की हो तो आज लोग नॉन-स्टील, एल्यूमिनियम का उपयोग कर रहें हैं। नॉन-स्टील में पॉलीटेट्राफ्लुरोएथिलिन होता जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। साथ ही एल्युमिनियम के पात्रों का उपयोग करना भी गलत है। हमारा ख्याल हमे खुद रखना है। इसलिए ये हमे देखना है कि कैसे बर्तनों में खाना बनायें और खायें जो सही हो।

मिट्टी के बर्तनों का उपयोग

अगर मिट्टी के बर्तनों का उपयोग खाना बनाने, पानी पीने, और खाने के लिए किया जाये तो यह हमारे बहुत लाभकारी होगा। हमारे घरों में ज्यादा तो नहीं लेकिन मिट्टी के थोड़े बहुत बर्तन मिल ही जाएंगे। जैसे मटका और ग्लास। बहुत ज़्यादा नहीं लेकिन पानी तो हम आसानी से मिट्टी के पात्रों से पी सकते हैं। लेकिन आधुनिक युग में ये सब करना कुछ लोगों को नासमझी वाला कार्य लगता है। पहले मिट्टी के बर्तनों का उपयोग अत्यधिक मात्रा में होता था तो कुम्हार भी इसे बनाने में दिलचस्पी रखते थे। उपयोग कम होने के कारण उन्हें अपना जीवनयापन करने के लिए अलग क्षेत्र के कार्यों को करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य को करता है तंदुरुस्त

मिट्टी के पात्र बायोडिग्रेडेबल होने के साथ पर्यावरण के लिए भी सही होते हैं। एक तो मिट्टी के बर्तन खरीदने में ज्यादा पैसे नहीं लगते। दूसरा यह खाने वाली सामग्रियों के PH स्तर को बनायें रखता है।

मनसुखभाई प्रजापति

यह बात सुनकर विश्वास तो नहीं होगा लेकिन यह सच है कि मिट्टी के बर्तनों के साथ गुजरात (Gujrat) के मनसुखभाई प्रजापति (Mansukhbhai Prajapati) मिट्टी के फ्रिज़ भी बना रहें है जो बिजली से चलता है। यह एक कुम्हार परिवार में जन्में हैं। इन्हें मिट्टी से बेहद लगाव है। इनका परिवार चाहता था कि वह कुछ अलग कार्य करें जिससे अच्छी-खासी आमदनी हो। लेकिन मनसुखभाई मिट्टी के बर्तनों को बनाने में ही रुचि रखते थे और इसी में लगे रहें। इनके मिट्टी के पात्र फ्रिज़ कूलर इंडियन ही नहीं विदेशी व्यक्ति भी खरीदतें हैं। खुद को एक व्यवसाय से जोड़ने के साथ इन्होंने अन्य कुम्हारों को भी रोजगार दिया है। मिट्टीकुल बर्तनों में सभी प्रकार के बर्तन बनायें जाते हैं जैसे ग्लास, हांडी,जग, प्लेट, तवा, और बोतल आदि।

राजेन्द्र क्ले हैंडीक्राफ्ट

मिट्टी के पात्र बनाने के लिए राजेंद्र प्रसाद प्रजापति (Rajendra Prasad prajapti) भी प्रसिद्ध हैं। यह सन 1990 से मिट्टी के पात्र बनाने में लगें हैं। अपने व्यवसाय की शुरुआत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सहायता से करी। हरियाणा (Hariyana) के एक क्षेत्र “भारत यात्रा केंद्र” में राजेंद्र का दुकान भी है। इन्होंने अपने दुकानों में खाना बनाने से पानी पीने तक के सभी पात्र रखे हैं। कोई भी व्यक्ति उचित मूल्य पर इनकी दुकान से बर्तन खरीद सकता है। राजेंद्र जब बर्तन बनाते है तो उनका परिवार पूरी तरह से उनकी उनकी मदद करता है जिससे उन्हें बर्तन बनाने में बहुत सहायता मिलती है। अगर आपको बर्तन के बारे में कोई भी जानकारी लेनी है तो आप राजेंद्र के यूट्यूब चैनल और वेबसाइट की मदद से सारी जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं। आप राजेंद्र के पात्र दुकान के साथ-साथ ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। यह मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कैसे करना है, यह भी बताते हैं।

जिस्ता कुकवेयर

जिस्ता कुकवेयर बेंगलुरु में स्थित है। इसकी शुरुआत भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने के लिए की गई है। वरिश्ता संपत, आर्चीश माधवन और मीरा रामकृष्णन के द्वारा इसकी शुरुआत हुई। ज़िस्ता की मदद से लगभग 80 से भी अधिक कारीगरों को रोजगार मिला है। जिस्ता कुकवेयर मिट्टी ही नहीं बल्कि लोहे और सोपस्टोन के बर्तन का भी व्यवसाय है। यह चावल पकाने के लिए बेहद नायाब तरीके से पॉट बनाता है। इस पॉट में छिद्र होते हैं और इसको ढकने के लिए ऊपर का ढक्कन भी होता है जिससे यह सबको पसन्द आता है। इस पॉट को छिद्र बनाकर उसे स्ट्रेनर के रुप में परिवर्तित किया गया है।

माटीसुंग

मिट्टिसुंग एंटरप्राइज की स्थापना दिल्ली में राज प्रजापति ने की है। इनके पिता दुलीचंद प्रजापति को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलें हैं। दुलीचंद के कार्यों से लगभग 40 वर्षों से जुड़े हैं। इन्होंने 21 संगीत वाद्ययंत्र, लगभग 4 फिट तक का वाइन ग्लास के साथ 9 फिट तक का वाइन बोतल और पॉट जैसे अन्य पात्रों का निर्माण किये हैं। अपने पिता की इस लग्न को देख इनके बेटे ने भी सोंचा की मैं अपने पिता की कला को पूरे विश्व मे को दिखाऊंगा। तब उन्होंने माटीसुंग की स्थापना करी। माटीसुंग मिट्टी के बर्तन ही नहीं बल्कि कुकर, इडली मेकर और चायपत्ती को रखने के लिए डब्बे भी बनाते हैं। अगर आपको बर्तन खरीदने हैं तो आप बल्क में भी अपना आर्डर दे सकते हैं।

क्ले हॉट पॉट

क्ले हॉट पॉट की सहायता से कोई भी व्यक्ति आसानी से ऑनलाइन मिट्टी से निर्मित चूल्हा खरीद सकता है। क्ले हॉट पॉट मिट्टी के अलग-अलग तरह से बर्तन तैयार करता है। यह ब्रियानी बनाने के लिए ब्रियानी हांडी भी निर्मित करता है। साथ ही टिपिन, ग्लास, कटोरी आदि भी कोई यहां से ऑनलाइन खरीद सकता है।

कैसे करें मिट्टी के पात्रों का उपयोग

मिट्टी के बर्तन को खरीद उन्हें 1 दिन के लिए पानी मे अवश्य रखें तब उनको सुखाकर उपयोग करें।
खाना बनाने से पहले इन पात्रों को पानी मे डालकर रखें फिर इनका उपयोग करें। खाना बनाने के पश्चात इसे किसी कपड़े के ऊपर रखें। आंच को तेज ना करें। मध्यम लेवल पर रखकर ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाएं। इन पात्रों को धोने के लिए सिर्फ मिट्टी या राख के साथ बेकिंग पावडर का उपयोग करें। अगर बर्तन जलें हैं तो उन्हें नारियल के खाल की मदद से साफ करें और सूखा होने के बाद इन्हें संजो कर रखें।

मिट्टी के महत्व और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कैसे करना है यह सब आपको बता दिया गया है इसके फ़ायदे भी। अब यह हमारे ऊपर निर्भर है कि हमें हमारे स्वास्थ्य ठीक रखना है या खराब। The Logically मिट्टी के बर्तन बनाकर उनके उपयोग के बारे में बताने के लिए सभी स्वजनों को नमन करता है। साथ ही अपने पाठकों से अपील करता है कि वह अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए मिट्टी के पात्रों का भी उपयोग करें।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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