Sunday, October 24, 2021

पति ने महज़ 200 रुपये के लिए इन्हें बेच दिया, आज हैं पंजाब की पहली महिला एम्बुलेंस ड्राइवर: प्रेरणादायी सफर

लड़कियों की ज़िंदगी में अगर कोई तकलीफ है तो आम तौर पर लोगों के द्वारा उन्हें यह दिलासा दिलाया जाता है, “तुम्हे आज इतनी तकलीफ है, आने वाले भविष्य में नहीं होगी। जब तुम्हारी शादी होगी तो तुम्हारा पति हमेशा साथ देगा और जीवन मे खुशियां मिलेंगी।” लेकिन दुख इस बात का होता है कि जब लड़की की शादी हो और वह अपने नए परिवार में जाएं। वहां भी उसका परिवार उसे ना समझे, वहां उसे कोई दिलासा नहीं दे तो……..? आज भी हमारे समाज में औरतों को अपने और अपने बच्चों के जीवन यापन के लिए संघर्ष करने पड़ रहें हैं। आज की यह कहानी एक ऐसी औरत की है जिन्हें उनके पति ने 200 में बेच दिया। लेकिन इन्होंने अपनी जिंदगी से मुंह नहीं मोड़ा और बन गई पंजाब की प्रथम महिला एंबुलेंस चालक। आइए पढ़ते हैं, इस साहसी महिला की कहानी।

यह हैं मनजीत कौर

मनजीत कौर (Manjit Kaur) जालंधर (Jalndhar) की रहने वाली हैं और एंबुलेंस चालक (Ambulance Driver) है। वह 14 वर्षों से यह कार्य कर रही हैं। लेकिन इनके लिए ये सब इतना सरल नहीं था जितना हमें सुनने और पढ़ने में लग रहा कि एम्बुलेंस तो कोई भी औरत चला सकती है। इन्होंने अपने कार्य से एक अलग पहचान बनाई है। हमारे समाज में अधिकतर लोगों कि यह धारणा है कि जो कार्य पुरूष करेंगे वह महिला नहीं कर सकती। लेकिन इस धारणा या कथन को मनजीत ने असत्य साबित किया, वह एम्बुलेंस चलाना शुरू की।

Manjeet kaur

नाबालिक थी तब ही हुई शादी

यह मात्र 15 वर्ष की थी तब इनकी शादी हो गई। शादी के पहले इनकी जिंदगी अच्छी तरह चल रही थी। लेकिन अब जिंदगी कठिनाइयों से भर गई। इनका पति शराब पीकर आया करता था और इनके साथ गलत व्यवहार भी करता था। शराब पीने के लिए वह घर के किसी भी समान को बेच देता।

इन्हें 2 सौ रुपये में बेचा

इनका पति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए घर का सामान बेच दिया करता था। एक दिन उसने इन्हें भी 2 सौ रुपये में बेचा। जब इस बात की जानकारी मनजीत को हुई तो वह किसी भी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकली। वह अपनी छत से भागकर किसी और के घर चली गई।

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पति ने 2 बेटियों की ली जान

इनके पति ने इनकी दो बेटियों की जान ली है। मनजीत की एक बेटी मात्र 1 माह की ही होगी तब इनके पति ने अपनी बेटी को जमीन पर गिराकर उसकी जान ले ली। कुछ दिन बाद जब मनजीत प्रेग्नेंट हुई इस दौरान उसने 7 माह की बेटी को उनके गर्व में मार डाला। 1996 में मनजीत को बेटा हुआ।

अपने बच्चे को बेहतर जीवन देने के लिए सीखा यह कार्य

यह ज्यादा शिक्षित नहीं थी, इस कारण इन्हें कोई कार्य करना नहीं आता था। इसलिए पैसे कामाने और अपने बच्चे की जिंदगी सवारने के लिए इन्होंने एम्बुलेंस चलाना सीखा। इनके घर के हालात भी कुछ ऐसे थे कि इन्हें बहुत सारी कठिनाइयों को झेलना पड़ता था।

Manjeet kaur first women ambulance driver

परिवार का नहीं था साथ

इन्होंने यह जानकारी दी कि उन्हें उनके परिवार की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला। इनके मायके वालों ने उनसे रिश्ते खत्म कर लिए थे। लेकिन उनका एक मुंह बोला भाई था जिसने उनकी मदद की। आगे यह कार चलाना सीखने लगी। वह दिन में अपना कार्य किया करती थी और रात को यह सीखती थी। उन्होंने जैसे-तैसे करके कुछ पैसे इकट्ठे किए और एक गाड़ी ली जो कूड़े में पड़ी थी। उस गाड़ी को इन्होंने ठीक किया और फिर उसके साथ अपने कार्य का शुभारंभ किया। इन्होंने एंबुलेंस चलाने की शुरुआत की लेकिन किसी कारणवश कुछ ही दिनों बाद इसे बेचना पड़ा। अब मनजीत जोहल हॉस्पिटल में एंबुलेंस ड्राइविंग का काम कर रही हैं। हालांकि यह इतनी पढ़ी-लिखी नहीं है कि जिससे इन्हें रोड का पता हो। लेकिन यह साइन बोर्ड के माध्यम से हर एरिया को याद रखती हैं।

मिला है सम्मान

मनजीत को इस कार्य के लिए लोगों से बहुत ही सम्मान मिला है। यह कार्य करना इनका शौक नहीं बल्कि मजबूरी थी। इन्हें इनके कार्य के लिए लोगों की तरफ से एक्स्ट्रा पैसे मिलते हैं। यह कार्य मनजीत लगभग 14 साल से कर रहीं हैं। यह यूपी, बंगाल जैसे शहरों में एम्बुलेंस लेकर जाया करतीं हैं।

अपने बच्चे की बेहतर जिंदगी और भरण पोषण के लिए जो कार्य कर मनजीत ने अपने साहस का परिचय दिया है, इसके लिए The Logically मनजीत कौर को सलाम करता है।