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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ”जब सुप्रीम कोर्ट ने कानून के अमल पर रोक लगा दी है, तब किसान धरने पर क्यों हैं?

नए कृषि कानून (Farmer law) को लेकर सरकार और किसानों में कई दिनों से चल रही बातचीत का कोई निष्कर्ष सामने नहीं आ रहा है। अगर कुछ मिली है तो वो है “तारीख”। सरकार और किसानों में तारीख पर तारीख का एक ऐसा वार पलटवार चल रहा है जिसमें कोई भी झुकने को तैयार नहीं। अब 19 जनवरी को 10 वें दौर की बातचीत होनी तय है लेकिन उससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Minister of Agriculture Narendra Singh Tomar) का बड़ा बयान आया है।

SC ने कृषि कानून पर रोक लगाई, तो केंद्र ने किसानों से मांगा दूसरा विकल्प

कृषि मंत्री ने रविवार को कहा कि कानूनों को निरस्त करने के अलावा अगर यूनियन कोई विकल्प बताएं तो उस पर सरकार विचार करेगी। बता दें डेढ़ महीने से अधिक समय से चल रहे इस आंदोलन को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला सुनाया है। SC ने अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है।

Farmer protest

कानून निरस्त करने के अलवा कोई दूसरा विकल्प हो तो बताइए: नरेंद्र सिंह तोमर

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ”जब सुप्रीम कोर्ट ने कानून के अमल पर रोक लगा दी है, तब किसान धरने पर क्यों हैं? कानून रद्द करने के अलावा कोई दूसरी मांग है तो किसान बताएं, सरकार खुले मन से चर्चा करेगी। कोई भी कानून पूरे देश के लिए बनता है। अदालत ने अभी कानून के अमल पर रोक लगा रखी है, कोई बात है तो कमेटी के सामने भी रख सकते हैं।”

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उन्होंने कहा, ”हमने किसान यूनियनों को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें हम मंडियों, व्यापारियों के पंजीकरण और अन्य के बारे में उनकी आशंकाओं को दूर करने पर सहमत हुए थे। सरकार भी पराली जलाने और बिजली से जुड़े कानूनों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुई थी। लेकिन यूनियनें केवल कानूनों को निरस्त करना चाहती हैं.”

विडियो यहां देखें –

दो मांगों को पहले से ही स्वीकार कर चुकी है सरकार

बता दें कि आंदोलनरत किसान तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े हुए हैं जबकि बिजली अनुदान और पराली दहन से संबंधित दो अन्य मांगों को सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी है।

पंजाब में चल रही है ट्रैक्टर रिहर्सल, निष्कर्ष दूर तक नहीं

पंजाब के कई इलाकों में किसान ट्रैक्टर रैली (Farmer Tractor Rally) के लिए रिहर्सल कर रहें हैं। किसान यूनियन का रुख सख्त और सरकार भी अपने रवैए पर अडिग। ऐसे में 19 जनवरी की बातचीत का निष्कर्ष निकले इसकी कम ही आस है।

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