Sunday, September 19, 2021

केवल 60 स्क्वायर फ़ीट में 26 तरह की सब्जियां उगाता है यह इंजीनियर, पिछले 21 वर्षों में बाजार से नही खरीदी सब्जी

भारत की अधिकतर आबादी कृषि पर निर्भर है। मनुष्य को जीने के लिये भोजन बहुत आवश्यक है और भोजन के लिये खेती करना जरुरी है। यदि हमें खाने के लिये अन्न मिलता है तो यह किसानों की बदौलत ही सम्भव है। कृषि करने से अनेक लोगों को रोजगार भी मिल जाता है। आजकल कृषि के क्षेत्र में कई तरह के रोजगार उभर कर सामने आये हैं।

कृषि में लोगों का रुझान कुछ इस तरह से बढ रहा है कि कुछ लोग अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कृषि कार्य में लगे है तो वहीं कुछ लोग अपनी अच्छी नौकरी से वक्त निकाल कर कम भूमि पर ही खेती कर रहें।

इसी सन्दर्भ में आज आपको ऐसे शख्स के बारें में जानने मिलेगा जो इंजीनियर होते हुए भी सिर्फ 60 वर्ग फीट में 26 विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगातें है। उन्होंने इससे एक बेहद आकर्षक किचन गार्डन का निर्माण भी किया है।

नासर (Naasar) केरल (Kerala) के अलाप्पझुआ जिले के एक कस्बा अरुकुट्टी के रहनें वाले हैं। नासर पेशे से एक इंजीनियर है। नासर का लालन-पालन किसान परिवार में हुआ है। घर पर कृषि संबंधी कार्य को देखने में नासर की बहुत दिलचस्पी थी। बुवाई से लेकर कटाई तक यह सब नासर बड़े चाव से देखते थे। खेती के कार्य से नासर की रुचि कभी खत्म नहीं हुईं और वह लगातार 21 वर्षों से अपने परिवार के लिये सब्जियां उगा रहें है। नासर ने बताया कि उन्हें पिछ्ले 2 दशक में कभी भी बाजार से सब्जी खरीदने की जरुरत नहीं पड़ी।

नासर का कहना है कि यदि जगह कम है तो ये कोई परेशानी वाली बात नहीं है। यदि हम अपने कम भूमि के क्षेत्र के लिये सही योजना बनाते हैं तो अपनी आवश्यकता के अनुसार सभी सब्जियों को उगा सकतें हैं। नासर ने आगे बताया कि, सभी घर में एक किचेन गार्डेन होना जरुरी है। अपने खुद के हाथों से उगाई हुईं ताजी सब्जियों को खाने से बहुत ही सुकून और संतुष्टि का अनुभव होता है। यदि अविश्वसनीय रूप से एक बार भी इस सुख की अनुभूति जो कर लेता है वह खेती करने से ना नहीं कह पायेगा।

नासर ने खेत को लताओं और कंद अलग-अलग भागों में बांट दिया गया है। खेतों में उतना ही जगह छोड़ा गया है जितने में इन्सान खेत में जा सकें। नासर के किचेन गार्डेन में गाजर, फुलगोभी, अदरक, टमाटर, ककड़ी, करेला, पालक और मिर्चों के अलग-अलग किस्म की हरी सब्जियां उप्लब्ध हैं।

बहुत कम भूमि में अधिक और अच्छी सब्जियों के उपज के लिये इन्जीनियर नासर ने कुछ सुझाव भी दिये है, जो इस प्रकार हैं:-

  1. इन्सान को 60 वर्ग फीट में 60 ग्रो बैग सेट करने में योग्य होना चाहिए। बीन्स के लिये मुख्य रूप से 15 ग्रो बैग अलग रखना चाहिए। इसके बाद बाकी को प्रतिदिन की सब्जियों के लिए अलग रखना चाहिए।
  2. पौधों को इस प्रकार रखना चाहिए जिससे पौधों को सूर्य की पर्याप्त मात्रा मिल सके।
  3. बरसात के सीजन में, खरपतवार और अन्य कीटों को मिट्टी से बढ़ने वाले बैग में जाने से रोकने के किये मिट्टी के ऊपर जलरोधी चादर को बिछाया जा सकता है।
  4. रासायनिक किटनाशकों और उर्वरक को पौधों में डालने से बचना चाहिए।
  5. पौधों में पानी डते समय बहुत सावधानी बरतनी होगी। पौधें पानी में ना डुबे इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए क्यूंकि यदि पौधें पानी में डूबे रहेंगे तो उनकी ग्रोथ को भारी नुक़सान हो सकता है।
  6. गर्मियों के मौसम में, पौधों को पर्याप्त मात्रा में पानी देने के लिये ड्रिप सिंचाई प्रणाली का प्रयोग करना चाहिए।
  7. विकसित थैलियों को सूखे खाद पावडर, मिट्टी और रेत को बराबर मात्रा में भरना चाहिए और इसमें पौधों को बहुत ही सावधानी से लगाना चाहिए। इंजीनियर नासर का कहना है कि, वह खेतों में विशेष रूप से खाद का उपयोग करतें है। उनका मानना है कि रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के प्रयोग से इन्सान खेती के प्राकृतिक प्रक्रिया में बदलाव करतें हैं। सभी को आर्गेनिक फर्टिलाइजर का हमेशा चयन करना चाहिए। इससे फसलों का पैदावार बेहतर होगा और अच्छी स्वास्थ्य के साथ अच्छे मुनाफे भी मिलेंगे। अपने खेतों में डालने के लिये नासर घर का बना जैविक खाद का प्रयोग करतें है। जैविक खाद में वे 1kg ताजा खाद, 1-किलो गुड़, 1-किलो मंगफली का केक पाउडर, और 1/2- किलो केला को 30 लीटर पानी में मिला दिया जाता है। उसके बाद 7 दिनों के लिये सोख लिया जाता है। नासर बताते है कि इस समय के दौरान मिश्रण को दिन में कम से कम एक बार मिलाना चाहिए। इस मिश्रण को पौधों में डालते समय इसका उपयोग पानी के साथ 1:8 के अनुपात में करना चाहिए। इस उर्वरक को 45 दिनों तक संग्रहीत किया जा सकता है। 1 एकड़ की जमीन पर इंजीनियर नासर मिश्रित कृषि भी करतें है। मिश्रित खेती में नासर अधिक संख्या में लीची, नारियल, सपोटा और मैंगोस्टिन जैसे पेड़ जैसे फलों को उगाते है। वर्तमान में इंजीनियर नासर ऑर्गेनिक केरल चैरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव है। उन्होंने अपने शहर के कई ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया है। नासर को अपनी अनोखी खेती की तकनीक के लिये अनेक स्थानीय समितियों ने उन्हें पुरस्कृत भी किया है। The Logically इंजीनियर नासर द्वारा किये गयें कार्यों की सराहना करता है।