Sunday, September 19, 2021

असम की नीलम दत्ता से खेती सीखने सुदूर से लोग आते हैं, नई पद्धति की खेती से अनेकों लोगों को आत्मनिर्भर बना रही हैं

अपनी मिट्टी से लगाव रखना देश के लिए सबसे बड़ा प्यार है“। वर्तमान में अगर देखा जाए तो हमारे देश के 50% लोग यही कार्य कर रहे हैं कि वह अपनी मिट्टी से लगाव रख खाने युक्त सब्जियां, फल और अनाज अपने तरीके से उगा रहे हैं। इस क्षेत्र में हमारी महिलाएं भी बढ़-चढ़ कर अपना योगदान दे रही हैं। आज की कहानी उन्हीं महिलाओं में से एक महिला की है जो फल सब्जियां और औषधियों को उगाया करती हैं और दूसरों को भी इसके तरीके सिखाती है। तो आईए जानते हैं उनकी कहानी।

नीलम दत्ता और उनकी खेती

नीलम दत्ता(Neelam Dutta) जो कि असम (Assam) से सम्बंध रखती हैं। वह भारत के असम(Assam) राज्य के बिश्वनाथ(Biswanath) जिले में पाभोई(Pabhoi) नामक एक गाँव में रहती हैं। वह एक जैविक किसान हैं और अपने दिवंगत पिता से प्रेरित हैं। वह खेती अपने खाने, वस्तु विनिमय और फिर उन उत्पादों को बेचने के लिए करती हैं। नीलम जी लगभग 10 एकड़ जमीन में चावल, फल और सब्जियाँ उगाती हैं। अच्छी उपज से वह बहुत खुश रहती हैं। उन्हें अपने खाने का स्वाद और स्वास्थ्य का लाभ हो इसके लिए यह कार्य करती हैं।

बायोडायनामिक तरीके की शुरुआत

यह 7 साल का एक फसल रोटेशन करती हैं और मूल रूप से जैविक खाद पर निर्भर हैं। यह बहुत सारे खाद और वर्मीकम्पोस्ट अपने खेतों में डालती हैं। खेती के साथ ही वह बायोडायनामिक(Biodynamic) तरीके भी शुरू की हैं। यह नीम और स्थानीय औषधीय पौधों के साथ गोमूत्र आधारित कीट रेपेलेंट भी बनाती हैं। यह आमतौर पर अपने स्वयं के बीज बचाती हैं और स्थानीय किसानों और बीज सेवकों के बीच वस्तु विनिमय भी करती हैं।


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जलवायु बनती है सबसे बड़ी बाधक

नीलम अभी जो सबसे बड़ी बाधा झेल रही हैं, वह है भंडारण और कटाई के बाद की सुविधाएं। क्योंकि यह एक उष्णकटिबंधीय जलवायु में रहती हैं जहाँ अपनी उपज और बीज लंबे समय तक स्टोर नहीं कर सकते हैं। जलवायु के कारण उन्हें अपनेे उत्पाद अधिक अवधि तक सुरक्षित रखने में बहुत कठिनाई होती है।

राज्य में प्रथम जैविक किसान सहकारी समिति की शुरुआत

नीलम ने अपने राज्य में पहली जैविक किसान(First Organic farmer) सहकारी समिति शुरू की है। यह दो राज्यों नागालैंड(Nagaland) और अरुणाचल प्रदेश(Arunachal Pradesh) में महिला समुदायों के साथ काम कर रहे हैं। जहाँ वह लोगों को बीज की बचत और सामुदायिक जैविक खेती(Community Organic farming) के लिए प्रशिक्षित किया करती हैं।

नीलम जी ने जैविक खेती कर ना सिर्फ खुद उसके उत्पाद प्राप्त कर रही हैं बल्कि अन्य लोगों को भी इस उन्नत कृषि के गुर सिखा रही हैं। The Logically नीलम दत्ता जी के द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करता है।