Wednesday, August 4, 2021

मात्र 3री कक्षा तक पढ़े हलधर नाग पर कई छात्रों ने PHD किया है, इनके अद्वितीय ज्ञान के चलते इन्हें पद्मश्री मिल चुका है

शिक्षा व्यक्ति को ज्ञानवान बनाती है। शिक्षा से हम सामाजिक और आध्यात्मिक गुणों से रूबरू होते है, जिससे हमारे व्यक्तित्व का विकास होता है। एक समय था जब बिना पढ़े लिखे लोग भी सच्ची मेहनत और पूरी लगन से अपनी सफलता की कहानी लिख देते थे। शिक्षा का महत्व पहले भी था और आज भी है, यह वह अथाह सागर है जिसे हम कभी पार नहीं कर सकते है। कुछ ज्ञान हमारे भीतर भी समाहित रहता है जिसे हम समय पर प्रकट करें और खुद से रूबरू हो तो हमारी सफलता में शिक्षा की कमी भी बाधा नहीं बन सकती है। एक ऐसे ही व्यक्ति है “कवि हलधर नाग” जो स्कूली शिक्षा ना के बराबर प्राप्त किए लेकिन अपने जन्मजात ज्ञान को प्रकट किए और सफलता की इबादत लिख दिए जिसके लिए उन्हें 2016 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

उड़िया कवि हलधर नाग एक ऐसे व्यक्ति है जो मात्र तीसरी कक्षा तक की पढ़ाई किए, लेकिन उनके आत्मीय ज्ञान से आज हर कोई रूबरू है। उन्होंने यह साबित किया है कि शिक्षा केवल किताबों के पन्नों तक ही सीमित नहीं है। हलधर नाग ने अपने जन्मजात ज्ञान को अपने लेखनी के माध्यम से ऐसे प्रकट किए कि साल 2016 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा 66 वर्ष की उम्र में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान समारोह में पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए। हलधर नाग ने ज्ञान की एक अलग ही परिभाषा को जन्म दिया। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि ज्ञान केवल किताबों में ही नहीं होता कुछ ज्ञान हमें जन्मजात भी मिलता है।

कवि हलधर नाग (Haldhar Nag) कोसली भाषा के कवि हैं। वह अबतक अनेकों कविताएं और 20 महाकाव्य लिख चुके हैं। वे इन रचनाओं को केवल लिखे हीं नहीं है बल्कि उन्हें एक-एक अक्षर याद भी है। उनके लेखनी को संबलपुर विश्वविद्यालय में एक संकलन ‘हलधर ग्रंथावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा भी बनाया गया है। इस पर अमल करना थोड़ा मुश्किल है कि एक तीसरी पास व्यक्ति महाकाव्य लिख सकता है, लेकिन हलधर नाग ने यह साबित किया है कि वो किताबी ज्ञान के मोहताज नहीं है। हलधर नाग जैसे तीसरी पास इंसान पर पांच शोधार्थियों ने अपना पीएचडी पूरा किया हुआ है।

कवि हलधर नाग का परिचय

हलधर नाग (Haldhar Nag) का जन्म ओड़ीसा (Odissa) के बारगढ़ जिले के घेंस गांव में हुआ था। हलधर जब मात्र 10 साल के हुए तब ही उनके पिता का साया उनके सर से उठ गया, जिससे बचपन से ही उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पिता के मौत के बाद असमय ही घर के सारे जिम्मेदारियों का बोझ उनके सर पर आ गया। समय नहीं मिलने के कारण हलदर की पढ़ाई बीच में ही छूट गई। वे मात्र तीसरी कक्षा तक ही पढ़ पाए। घर की आर्थिक जरूरतों में मदद के लिए हलधर एक मिठाई की दुकान पर बर्तन धोने का काम करने लगे। 2 वर्ष बाद हलधर नाग को उनके गांव के एक व्यक्ति उन्हें हाई स्कूल लेे गए लेकिन हलधर वहां पढ़ाई नहीं किए बल्कि स्कूल में ही रसोईये का काम करने लगे और 16 वर्ष तक वहीं काम करते रहे।

हलधर नाग के अनुसार समय के साथ उनके क्षेत्र में काफी बदलाव हुए, ज़्यादा से ज़्यादा स्कूल खुले। एक समय उनकी मुलाकात एक बैंक कर्मचारी से हुई। हलधर ने उनसे 1000 रूपए कर्ज़ लेकर एक छोटी सी दुकान खोली, जिसमें स्टेशनरी से जुड़ी चीज़े और बच्चों के लिए खाने-पीने की चीज़ें भी उपलब्ध थी।

उसी बीच हलधर अपने अंदर छुपी प्रतिभा से रूबरू हुए और उन्होंने 1990 में अपनी पहली कविता ‘ढोडो बारगाछ (पुराना बरगद का पेड़) की रचना की और उस कविता को स्थानीय पत्रिका में प्रकाशन के लिए भेजा। साथ ही और 4 कविताएं भी भेजे। उनकी सारी कविताएं प्रकाशित भी हुई। लोगों द्वारा उनकी कविताओं को काफी सराहना भी मिली… जिससे उनका मनोबल काफी बढ़ गया और शुरू हुआ आगे बढ़ने का सफर। उन्हें लिखने के लिए और भी प्रोत्साहना मिली जो उनके लिए काफी सम्मान की बात थी। वो अपने आस-पास के गावों में जाकर अपनी कविताएं लोगों को सुनाये, लोगों ने खूब सराहा भी। आगे वह ‘लोक कवि’ रत्न के नाम से प्रसिद्ध हुए।

ओड़ीसा (Odissa) में लोक कवि रत्न के नाम से प्रसिद्ध हलधर नाग की कविता – प्रकृति, समाज, पौराणिक कथाओं और धर्म पर आधारित विषयों पर होते है। वे अपने रचनाओं के माध्यम से समाज में हो रहे कुरीतियों को समाप्त कर सभ्य समाज का निर्माण करना चाहते हैं। हलधर की कविताओं का मुख्य भाषा कोसली है जिसे युवा वर्ग के लोग भी काफी पसंद करते है। उन्हें अपनी कविताएं लिखते समय ही याद भी ही जाता है। उनसे किसी को कविता सुनने के लिए केवल कविता का नाम बताना पड़ता है विषय बताने की जरूरत नहीं पड़ती है। हलधर नाथ हर रोज 3-4 कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर कविताएं सुनते है।

कवि हलधर नाग की पोशाक

हलधर नाग हमेशा से ही उच्च विचार और सादा जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति है। उनकी सादगी में ऐसी आस्था है कि आज तक वे कोई फुटवियर नहीं पहने हैं। वह केवल धोती और सादा कुर्ता ही पहनते हैं।

खुद की प्रतिभा विकसित करने वाले कवि हलधर नाग जी को The Logically नमन करता है, जो बिना किताब के अपनी कविताएं सुनाने के लिए जाने जाते हैं। यह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है कि प्रतिभा किसी बन्धन या अभाव की मोहताज नहीं होती। ज़रूरत है हमें हमारी अंदर की प्रतिभा को जगाने, खुद पर विश्वास करने और आत्मविकास विकसित करने की।