Tuesday, November 30, 2021

इस युवक ने मात्र 3 साल में लगा दिया चंदन का जंगल, विशेष प्रकार का यह पेड़ बहुत कम पाया जाता है

किसी सफल व्यक्ति से ईर्ष्या करना कोई नई बात नहीं है। कोई अच्छा काम करो तो एक बात तो तय है कि लोग आपसे जलतें हैं या आपको बहुत कुछ कहतें हैं। लोगों की नजर में आप विश्व के सबसे मन्दबुद्धि वाले व्यक्ति बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है उत्तराखंड के युवकों के साथ। जब इन्होंने अपने कार्य का शुभारंभ किया तो लोगों ने मजाक बना दिया। फिर भी यह अपने रास्ते पर चलते रहे और अपने लक्ष्य को सफल आयाम दे रहे हैं।

प्रदीप कुमार

34 वर्षीय प्रदीप कुमार उत्तराखंड (Uttarakhand) के चामोली (Chamoli) जिले से ताल्लुक रखते हैं। इन्होंने अपनी पारंपरिक खेती को छोड़कर कुछ ऐसा करने का निश्चय किया जो सभी के हित के लिए हो। इस कार्य के लिए लोगों ने बहुत उनका मजाक उड़ाया। हालांकि वह कार्य आस्था और धर्म संबंधित है। उन्होंने “चंदन का जंगल” उगाने के बारे में निश्चय किया और इस कार्य में लग गए। प्रदीप ने लोगों की किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया। यह अपनी जी-जान लगाकर मेहनत करने लगे और फलस्वरूप यह हुआ कि 3 सालों के बाद वह जंगल “सफेद चंदन का जंगल” में विकसित हुआ और देखने योग्य हो गया। वो लोग जो प्रदीप और उनके कार्यों का मजाक उड़ाया करते थे वे आज उनकी तारीफ करते हैं।

प्रदीप ने एमए-बीएड किया है

प्रदीप ने एमए-बीएड किया है और उन्होंने नौकरी ना करके अपने बुजुर्गों की जमीन पर कुछ ऐसा करने का निश्चय किया जो नायाब सिद्ध हो। हालांकि यहां सभी लोग परंपरागत खेती करते थे इनके पास भी कोई ऑप्शन नहीं था। प्रदीप ने बताया कि हमें इस खेती से कोई मुनाफा नहीं था। उस खेती में हम जो पैसे लगाते थे वह भी नहीं निकल पा रहे थे। यूं कहा जाए तो खेती के लिए अगर हम सिंचाई भी कर रहे हैं तो उसका पैसा भी निकालना हमारे लिए बहुत कठिन होता था।

निश्चय कर लगा दिया चन्दन का जंगल

यूं ही एक दिन प्रदीप ने सोचा कि क्यों ना मैं अपने गांव में चंदन के पौधों को लगाऊं। प्रदीप यह बात जानते थे कि बदरी-केदार में अधिकतर मात्रा में प्रत्येक वर्ष चंदन की खपत हो रही है। लेकिन यह चंदन कर्नाटक से आता है। फिर क्यों मैं इसे अपने गांव में लगाऊं। हालांकि उन्होंने इस बात का सजेशन अपने घर वालों से मांगी लेकिन घर वालों को इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। प्रदीप ने वर्ष 2017 में अल्मोड़ा में स्थित एक नर्सरी से चंदन के पौधे खरीदे और उन्हें अपने खेतों में लगा दिए।


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शुरूआत में लगाए 120 पौधे

प्रारंभ में प्रदीप ने 6480 वर्ग फीट जमीन पर चंदन के पौधों को लगाया। इस चंदन के पौधों में लगभग 120 पौधे शामिल थे और फिर इनकी देखभाल करने लगे। 3 साल मेहनत और देखभाल करने के बाद आज वह चंदन के पौधे जंगल में परिवर्तित हो चुके हैं। वर्तमान में अगर उनके खेतों को देखा जाए तो उसमें 12 फीट ऊंचे सफेद के चंदन खेतों में अपनी सुगंध फैला रहे हैं। इन पेड़ों में अब बीज भी निकल रहे हैं। प्रदीप ने इन बीजों से नर्सरी का निर्माण करना शुरू कर दिया है।

कमा रहें मुनाफा

चंदन ने इस बात की जानकारी दी कि उनके क्षेत्र में चंदन के पेड़ का विकास अच्छी तरह हो रहा है। इसलिए वह चाहते थे कि नर्सरी का निर्माण करें और उस पौधों को बेचकर मुनाफा कमाए। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पौधे 300 रूपये से भी अधिक पैसे में बिक रहे हैं जिससे प्रदीप मुनाफा कमा रहे हैं । सफेद चंदन का उपयोग पूजा, पाउडर, अगरबत्ती क्रीम और सौंदर्य प्रसाधन के निर्माण में किया जाता है।

लोगों की बातों को अनसुना कर अपने कार्य को दृढ़ निश्चय और कठिन मेहनत से पूरा कर प्रदीप ने एक बृहद प्ररेणा का संचार किया है। The Logically प्रदीप जी की भूरि-भूरि प्रशंसा करता है।