Friday, February 3, 2023

खीरे की खेती ने बदली इस किसान की तकदीर, सालाना 14 लाख रुपये की आमदनी हो रही है

अब खेती-बाड़ी को लेकर किसानों में जागरुकता फैल रही है जिससे वे खेती-किसानी में नई-नई तकनिक का प्रयोग कर रहे हैं। नए तकनीकों के प्रयोग से अब फसलों का अधिल उत्पादन हो रहा है जिससे किसान भाई पहले की अपेक्षा अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। राजस्थान के एक ऐसे ही किसान हैं जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके खीरे की खेती (Cucumber Farming) से बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

कौन है वह किसान?

हम बात कर रहे हैं किसान रामनिवास चौधरी (Ramnivas Chaudhary) की, जो राजस्थान (Rajasthan) के नागौर जिले (Nagaur District) गोगौर गांव के रहनेवाले हैं। वह पारंपरिक खेती न करके पॉलीहाऊस और शेडनेट हाऊस में खीरे और मिर्च की खेती करते हैं। एक एकड़ में खीरे की खेती के लिए 70 हजार रूपए के बीज की जरुरत पड़ती है।

वह कहते हैं कि जुताई से लेकर कटाई तक पूरा खर्च 2 से 3 लाख रुपये तक आता है। इसके अलावा वह एक एकड़ से 400 क्विंटल तक उत्पादन होता है जिससे उन्हें 7 से 8 लाख रुपये का मुनाफा होता है। हालांकि वह कहते हैं कि, ज्यादातर मुनाफा बाजार के भावों पर निर्भर करता है और उसी के अनुसार लाभ-हानि होता है।

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खीरे और मिर्च की खेती से कमाते हैं सालाना 14 लाख रुपये का मुनाफा

इसके बाजार के बारें में बात करें तो रामनिवास कहते हैं कि, मई-जून के महीने में खीरे की कीमत 45 रुपये किलो था लेकिन अब इसकी कीमत खिसक 15 से 20 रुपये किलो तक आ गया है। ऐसे में जब बाजार में इसकी कीमत अधिक थी तब मुनाफा अधिक हो रहा था लेकीन अभी कम कीमत होने के कारण फायदा कम हो रहा है। वह आगे कहते हैं कि, पूरे वर्ष में दो बार खीरे का उत्पादन के साथ-साथ वह मिर्च की भी खेती करते हैं। ऐसे में इन दोनों फसलों का उत्पादन करके वे सालाना 14 लाख रुपये का मुनाफा कमा लेते हैं।

3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है खीरे की फसल

कुछ लोगों का मानना होता है कि खेती-किसानी में बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है लेकिन रामनिवास ने बताया कि, खीरे की खेती (Cucumber Farming) में ज्यादा मेहनत करने की जरुरत नहीं होती है और यह ऐसा फसल है जो महज 3 से 4 महीने में तैयार हो जाता है। उन्होंने आगे बताया कि, खीरे की खेती में कम मेहनत होने के कारण बुवाई के लिए उन्हें मजदूरों की आवश्यकता नहीं पड़ती है ऐसे में उन्हें मजदूरों पर होनेवाले खर्च से भी मुक्ति मिलती है।

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खेती में नहीं करते हैं रासायनिक खादों का इस्तेमाल

आजकल लोग अत्यधिक उत्पादन की लालच से खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। (Cucumber Farming) इससे फसल जहरीला होने के साथ-साथ मिट्टी की उपजाऊ झमता भी धीरे-धीरे कम हो रही है। लेकिन रामनिवास अपनी खेती में रासायनिक खादों का इस्तेमाल न करके जैविक खादों का प्रयोग करते हैं और इससे उन्हें कम लागत में उत्पादन भी अच्छा होता है।

सरकार को करनी चाहिए किसानों की मदद

किसान रामनिवास कहते हैं कि, यदि सरकार की तरफ से किसानों को अधिक मदद मिले तो सभी किसान खेती-बाड़ी से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। क्योंकि कृषि क्षेत्र में नई-नई तकनीके विकसित हो गई है जिसका इस्तेमाल करके उपज बढ़ाया जा सकता है लेकिन इन तकनीकों की कीमत महंगी है। ऐसे में उच्च आय वर्ग के किसान तो इसे आसानी से खरीद सकते हैं लेकीन कमजोर आय वर्ग के किसानों के लिए यह मुश्किल है। ऐसे में कमजोर वर्ग के किसानों के लिए भी सरकार को अधिक मदद करने की जरुरत है।

20 लाख रुपये की लागत से शुरु किया पॉलीहाऊस

वह कहते हैं कि, उन्होंने खेती के लिए जब 5 साल पहले पॉलीहाऊस और शेडनेट हाऊस की स्थापना की थी उस समय उन्हें काफी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा था तब जाकर उन्होंने 20 लाख रुपये की बड़ी रकम से खेती के लिए इस तकनीक कर सके। (Chilli Farming) ऐसे में यदि सरकार की तरफ से सब्सिडी मिलती तो उन्हें इस काम में आर्थिक मदद मिल जाती।