घर के कचरों से खाद बनाकर गमले में ऑर्गेनिक सब्जी की खेती करती हैं, किसी भी सब्जी के लिए बाज़ार नही जाना पड़ता

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हमारे देश की महिलाएं हर क्षेत्र में कार्यरत है। वह अपने कार्यों को बखूबी जानती हैं। उनको पता है कि वे किन तरीकों से ख़ुद की और अपने परिवार वालों की जिंदगी बेहतर बना सकती हैं। एक गृहिणी होने के बाद वह अपने कर्तव्यों के साथ साथ रिश्तों को नायाब तरीके से संजोय रखती है। आज की हमारी यह कहानी एक ऐसी ही सफल गृहिणी की है। इनका नाम है रमेश दहिया। ये अपने घर को संभालने के साथ ही अपने पैरों पर खड़ा होकर “जैविक खेती” कर रहीं हैं। इन्होंने सभी गृहिणियों के लिए मिसाल कायम किया है।

रमेश दहिया का कार्य

रमेश दहिया (Ramesh Dahiya) आरके पुरम (RK Puram) की निवासी हैं। एक कुशल गृहिणी भी हैं। इन्होंने अपने घर के हर एक हिस्से को स्वच्छ रखा है। यह घर से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन कर उनका उर्वरक बना कर “जैविक खेती” करती हैं। इन्होंने अपने घर पर ही जैविक खेती के माध्यम से गमलों में सब्जियां उगा रखा है। इन्होंने जैविक खेती करने की प्रेरणा वाणी मुरथी से लिया है। जब इनके घर में सफाई कर्मचारी कचरे उठाने के लिए नहीं आते थे, तब वह अक्सर सोचती थी कि आख़िर मैं इन कचरों का करूं तो क्या करूं? इस बारे में बहुत सोचने के बाद उन्होंने विचार किया कि मैं भी वाणी मुरथी की तरह घर के कचरों से कंपोस्ट तैयार कर खेती करूंगी। फिर उन्होंने ऐसा ही करना शुरू कर दिया। अपने घर पर गिले वेस्ट से उर्वरक बना कर गमलों में सब्जियों और फूलों को उगाने लगीं।

अन्य तरह से बनाती हैं खाद

रमेश एक कुशल गृहिणी हैं। वह अन्य तरीको से उर्वरक का निर्माण कर जैविक खेती में उनका उपयोग करती हैं। वह जिस तरीके से उर्वरक बनाती है, उसे सिटी कंपोस्ट विधि कहा जाता है। यह गोबर, सिटी कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट से भी खेती करती हैं। सिटी कंपोस्ट विधि के माध्यम से खेती करने में मिट्टी की उपज बनी रहती है। यह पुराने टब, गमलों या छत पर पॉलीथीन बिछाकर उसमें मिट्टी डाल कर खेती करती हैं। इन्होंने इस जैविक खेती में लौकी, भिंडी, मटर, टमाटर, बैंगन और पपीते जैसे अन्य प्रकार के पौधों को उगाया हैं।

बेटे ने भी किया मदद

रमेश अपने बेटे की मदद से यह कार्य करती हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने केंचुए से खाद बना कर खेती की। लेकिन यह केंचुए ज़्यादा दिनों तक बिना गोबर के जिंदा नहीं रह सकते। इसलिए इन्होंने घर की साग सब्जियों के छिलकों और किचन वेस्ट से उर्वरक बनाना शुरू किया। जो थोड़ी मेहनत के बाद सफल हुआ। जो कार्य इस कुशल गृहिणी और जैविक खेती करने वाली Ramesh ने किया है, इससे हर गृहिणी को प्रेरणा लेनी चाहिए। जैविक खेती करने के इस अच्छे प्रयास के लिए The Logically रमेश दहिया (Ramesh Dahiya) को सलाम करता है।

Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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