Thursday, January 20, 2022

अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं बाबा केदारनाथ ! जानिए उनके बारे में..!

केदारनाथ मंदिर विश्व के प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। यह भारत के उतराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। केदारनाथ मंदिर हिमालय की गोद में स्थित है। तीन ओर पहाड़ों से घिरे इस मंदिर की सौंदर्यता मन को भा जाती है ! यह भूमि पाँच नदियों मंदाकिनी , मधुगंगा , क्षीरगंगा , सरस्वती और स्वर्णगौरी का संगम भी कहा जाता है ! इस पूरे इलाके का दृश्य अलौकिक है ! आस्था इसके कण-कण में बसा है !

यह मंदिर अप्रैल से नवंबर के मध्य में खुलता है। ऐसा माना जाता है कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने करवाया था। यहँ श्रद्धालु लोग हजारों के भीड़ में आते हैं। और भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को पूजा- अर्चना करते हैं। सुबह में शिव- पिंड को स्नान कराकर ज्योतिर्लिंग पे घी का लेप लगाया जाता है। धूप- दीप जलाकर आरती की जाती है। और इसी समय श्रद्धालु लोग भगवान शिव की आराधना करते हैं। संध्या के समय भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया जाता है और संध्या के समय श्रद्धालु लोग भगवान शिव जी का केवल दर्शन करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि 32 वर्ष की उम्र में शंकराचार्य ने केदारनाथ धाम में समाधि ली थी। और वर्तमान में उन्हीं के द्वारा मंदिर का निर्माण किया गया।

केदारनाथ मंदिर एक नहीं बल्कि पांच अलग- अलग मंदिरों का समूह है। इन सभी जगह भगवान शिव के अंग गिरे थे। इन्हे पंचकेदार के नाम से जाना जाता है। केदारनाथ मंदिर काफी मजबूत पत्थरों से बनाया गया है। यह मंदिर 6 फिट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। केदारनाथ मंदिर 85 फिट ऊंचा, 187 फिट लम्बा और 80 फिट चौड़ा है। इसकी दीवारें 12 फिट मोटी है। केदारनाथ मंदिर के अंदर मुख्य भाग मण्डप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है।

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केदारनाथ मंदिर के पीछे एक कुंड बना हुआ है। जिससे भगवान शिव जी का अभिषेक किया जाता है। और श्रद्धालु उस कुंड के जल को ग्रहण करते और अपने घर भी ले जाते हैं। इस कुंड के जल से बड़े से बड़े रोग ठीक हो जाते हैं। इस जल को गंगा के समान ही पवित्र माना जाता है। यहां श्रवण के महीने में ब्रह्मकमल खिलता है। जो भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। इस ब्रह्मकमल को भगवान शिव पर चढ़ने से सभी मनोकामनाएं सफल होती है।

2013 में आए आपदा के बाद वहाँ विकास का कार्य लगातार जारी है ! मंदिर प्रांगण और मंदिर के आस-पास पूरे क्षेत्र को पूर्व से भी खूबसूरत बनाया जा रहा है ताकि इस विशेष स्थल को पर्यटन के तौर पर विकसित किया जा सके ! गौरीकुंड जहाँ लोग केदारनाथ मंदिर के लिए चढते हैं वहाँ लोगों के रहने की उत्तम व्यवस्था विकसित किया जा रहा है ताकि किसी भी भक्तों को कोई भी दिक्कत ना हो ! इस विकास कार्य के दौरान केदारनाथ धाम को आगे आने वाले भूकम्प , भूस्खलन और बाढ तीनों आपदा से बचाने हेतु सभी बिन्दुओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है !


अपने भक्तिमय वातावरण और रमणीय स्थानों में से एक होने के कारण यह भक्तों के बीच बेहद प्रसिद्ध है ! शिव भक्तों को अपने जीवनकाल में यहाँ जाने की दिली ख़्वाहिश अवश्य होती है ! बाबा केदारनाथ को दर्शन करके लोग धन्य हो जाते हैं !