Sunday, November 29, 2020

मात्र 5वी तक पढाई किये और कभी तांगा चलाते थे,MDH वाले दादाजी आज मशालों के बादशाह बन चुके हैं

असली मसाले सच सच …. MDH…MDH । MDH का विज्ञापन हमसब बचपन से टीवी पर देखते आ रहे हैं । इसका विज्ञापन हमेशा बदलता रहता है पर कुछ नही बदलता है तो वह है एक चेहरा मूंछो वाले दादा जी का। हम में से तो कितने लोग तो ऐसे भी है जो MDH ( Mahashian di hatti) को मूंछो वाले दादा जी के नाम से जानते हैं। यह दादा जी हैं महाशय धर्मपाल गुलाटी। 1923 में अविभाजित भारत के सियालकोट में धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati)का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम है चुन्नी लाल गुलाटी और माता का नाम चनन गुलाटी हैं।

पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई

आज मसालों के बाज़ार का सबसे प्रसिद्ध नाम धर्मपाल गुलाटी ने अपनी पढ़ाई पांचवी कक्षा तक ही की हैं। इनके पिता चाहते थे कि बेटा खूब पढ़े लिखे पर धर्मपाल को पढ़ने में मन नही लगा। पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के बाद यह अपने पिता के साथ उनके काम मे हाथ बटाने लगे। धर्मपाल का बचपन नदी किनारे भैंस चराते, अखाड़े में कुश्ती सीखते, दूध बेचने मे अपने पिता की मदद करते बिता। इनके पिता पहले आईना बेचते थे फिर साबुन बेचने लगे। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने हार्डवेयर, कपड़े और राइस ट्रेडिंग में भी हाथ आजमाया। कुछ समय के लिए मसाले की दुकान भी खोली।

Dharampal Gulati

1500 रुपये लेकर दिल्ली आए

7 सितम्बर 1947 को विभाजन के समय धर्मपाल अपने पूरे परिवार के साथ अमृतसर आ गए। पर अमृतसर के पाकिस्तान के नजदीक होने से दंगा होने का डर था इसलिए 23 साल की उम्र में अपने साले के साथ वह 1500 लेकर अमृतसर से दिल्ली आ गए। धर्मपाल जानते थे कि दिल्ली में रहना पंजाब से सस्ता हैं। धर्मपाल के पास 1500 रुपये थे जिसमें से 650 रुपये का उन्होंने तांगा खरीदा और दिल्ली की सड़कों पर तांगा चला कर जीवनयापन करने लगे।

dharampal Gulati
MDH से पहले तांगा चलाते थे

मसाले के कारोबार पर यकीन था

विभाजन के पहले धर्मपाल गुलाटी ने अपने पिता के साथ मिलकर मसाले की दुकान खोली थी जिसका नाम था महाशियान दी हट्टी और इसे देगी मिर्च वाले के नाम से जाना गया। पर विभाजन होने के कारण इन्हें अपना सारा सामान छोड़ कर हिंदुस्तान आना पड़ा। धर्मपाल को मसाले के कारोबार का अनुभव था। धर्मपाल गुलाटी को मसाले के कारोबार और खुद पर यकीन था। उन्हें पता था कि वह इसमे अच्छा कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने अपना तांगा बेच दिया और करोल बाग के अजमल खान रोड पर एक छोटा सा लकड़ी की खोखा खरीदा। अपने छोटे भाई सतपाल के साथ इन्होंने मसाले के कारोबार में खूब नाम कमाया। यह दोनों भाई बाजार के नब्ज को समझते थे और इन्हें मसाले के कारोबार में अच्छा भविष्य दिख रहा था इसलिए इन दोनों भाइयों ने खारी बांवली जैसे इलाको में अपनी दुकानें खोली।

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दिल्ली का पहला आधुनिक मसाला स्टोर

अपने एक इंटरव्यू में धर्मपाल गुलाटी ने बताया था कि 1953 में उन्होंने दिल्ली में पहला आधुनिक मसाला स्टोर खोला। धीरे धीरे धर्मपाल गुलाटी का यह मसाला कारोबार आगे बढ़ने लगा। इनके मसालों की खासियत थी इसका आर्टिफिशल रंग और प्रिजर्वटिवे से दूर रहना। आज जहां बाज़ार में महंगे मसाले उपलब्ध है वही MDH सस्ती कीमत पर उपलब्ध हैं।

Dharampal Gulati
दिल्ली वाले दुकान पर महाशय चुन्नीलाल गुलाटी

मसाले के पैकेट पर धर्मपाल गुलाटी की फ़ोटो

MDH( Mahashian di hatti) मसालों को सफल बनाने में इसका विज्ञापन पर ज़ोर देने की रणनीति काम आयी। इसके साथ ही कंपनी ने कार्डबोर्ड पैकेजिंग का इस्तेमाल शुरू किया। इसपर ग्राहकों का ध्यान खींचने वाले शब्दो( जैसे फुल ऑफ फ्लेवर, टेस्टी) का इस्तेमाल करना शुरू किया। सबसे आकर्षक बात इसके पैकेजिंग में धर्मपाल गुलाटी के फोटो को लगाना था। इसके पीछे इनका तर्क था कि ग्राहकों को पता होना चाहिए कि वह किस से मसाले खरीद रहे हैं।

dharampal Gulati

कंपनी की खुद की क्वालिटी कंट्रोल लेब्रोटरी भी हैं

कंपनी अपना कच्चा मॉल केरल, कर्नाटक , अफगानिस्तान और ईरान से आयात करती हैं। मि4च मसाले, धनिया समेत अन्य मसाले आटोमेटिक मशीन से पिसे जाते हैं। कंपनी का खुद का गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला( quality control labrotary) भी है।

100 से अधिक देशों में मसालों का निर्यात

आज MDH के 64 से अधिक मसाले उपलब्ध हैं। इसकी देशभर में ही 15 फैक्ट्री है। MDH मैन्युफैक्चरिंग प्लांट देश के कई हिस्सों में है जिनमे से कुछ दिल्ली एनसीआर में हैं। MDH मसालों का आज 100 से अधिक देशों में निर्यात होता हैं। दुबई में इसकी फैक्ट्री है और शारजहां और यूएस में ऑफिस हैं। MDH का सामान आज 8 लाख खुदरा व्यापारी और 1000 थोक व्यपारियो के पास जाता हैं। इस FMCG कंपनी ने 2017 में 924 करोड़ का राजस्व कमाया ।

चैरिटी ट्रस्ट के ज़रिए समाजसेवा

MDH महाशय चुन्नीलाल चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए कई सामाजिक कार्य करती हैं। पश्चिमी दिल्ली में ट्रस्ट ने 300 बेड का अस्पताल बनवाया है जहां गरीबो का मुफ्त इलाज होता हैं। इसके अलावा बच्चो के पढ़ने के लिए 20 मुफ्त स्कूल का भी निर्माण करवाया गया हैं।

महाशय धर्मपाल गुलाटी(Dharampal Gulati) को उनके कार्यो के कारण पद्म भूषण से सम्मानित किया गया । माध्यम वर्गीय परिवार के रसोई में MDH मसालों की अपनी एक जगह हैं और इसका श्रेय धर्मपाल गुलाटी को जाता हैं। आज भले कोई किसी और ब्रांड के किसी सामान के संस्थापक को नही जानता है पर MDH मसालों का इस्तेमाल करने वाला हर शख्स मूछों वाले दादा जी को जानता हैं।

मृणालिनी सिंह
मृणालिनी बिहार के छपरा की रहने वाली हैं। अपने पढाई के साथ-साथ मृणालिनी समाजिक मुद्दों से सरोकार रखती हैं और उनके बारे में अनेकों माध्यम से अपने विचार रखने की कोशिश करती हैं। अपने लेखनी के माध्यम से यह युवा लेखिका, समाजिक परिवेश में सकारात्मक भाव लाने की कोशिश करती हैं।

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