Saturday, March 6, 2021

गांव की एक चौथी पास महिला ने बनाया ग्लोबल ब्रांड, मात्र 300 रुपये से 20 लाख की कम्पनी खड़ी की

कहा जाता है, “हाथ का हुनर कभी बेकार नहीं जाता।” यदि किसी के पास अपने हाथ का कौशल हो तो वह सफल होने का और रोजगार की राह बना ही लेता है। ज्यादातर लोगों के मन में अभी भी यही विचार आता है कि हुनर होने के बाद भी एक औरत कुछ नहीं कर सकती है। परंतु उसके विपरित हमेशा औरतों ने यह साबित किया है कि उनके जीवन में चाहे लाख मुसिबते सामने आये लेकिन वे उसके सामने घुटने नहीं टेकती। अपने जीवन में आनेवाली हर कठिनाईयों का सामना कर प्रेरणा की नयी मिसाल पेश करती है।

आज की कहानी भी एक ऐसी महिला की है जो सिर्फ चौथी कक्षा तक पढाई की हैं। इनका जीवन-यापन दूसरे के घर में काम कर के गुजरता है। उसके बाद भी उस महिला ने अपने हाथ के हुनर के बल पर और मुश्किलों का समान करते हुये 20 लाख रुपये का कारोबार शुरु कर दिया। आइये जानते हैं, इस प्रेरणादायक महिला के बारें में।

पोबिबेन रबारी गुजरात के कच्छ जिले के अन्जार तालुका के भदरोई गांव से नाता रखती हैं। ये पोबिबेन डॉट कॉम की संस्थापक हैं। पोबिबेन 5 वर्ष की थी तभी उनके पिता का देहांत हो गया। उस वक्त उनकी मां अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली थी। लेकिन उनकी गर्भावस्था में ही अपनी संतान का पेट भरने के लिये मजदूरी का कार्य करती थी। पोबिबेन ने भी अपनी मां के संघर्ष के सफर के बारें में समझने के बारें में अधिक वक्त नहीं लगाया।

business of pobiben

पोबिबेन ने बताया कि जब वह कक्षा 4 में थी उसी समय उन्होंने स्कूल छोड़ दिया क्यूंकि उससे अधिक शिक्षा ग्रहण करने की उनकी औकात नहीं थी। जब वह 10 वर्ष की हुईं तब वे अपनी मां के साथ लोगों के घर काम करने जाने लगी। उन्होने बताया कि वह लोगों के घरों में पानी भरने का कार्य करती थी। उसके लिये उन्हें सिर्फ 1 रुपया ही मिलता था। उसके कुछ वक्त बाद उन्होंने अपनी मां से कढाई का कार्य सिखा।

पोबिबेन आदिवासी समुदाय ढेबरिया रबारी से ताल्लुक रखती हैं। इस समुदाय के लोग पारंपरिक कढाई के जानकार होते हैं। इस समुदाय का यह रिवाज होता है कि लड़किया कपड़ो पर कढाई कर के उन्हें अपने ससुराल दहेज में लेकर जाती है। अर्थात वहां की बेटियों को दहेज के लिये कपड़ा बनाने के लिये 30 से 35 वर्ष माता-पिता के घर रहना पड़ता। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिये उस समुदाय के बुजुर्ग लोगों ने यह निश्चय किया कि कढाई का इस्तेमाल स्वयं के लिये नहीं किया जायेगा।

यह भी पढ़े :- 15 की उम्र में शादी और 16 में बच्चा होने के बाद, पिता से उधार लिए पैसों से बनाई 650 करोड़ का कारोबार: shehnaaz hussain

पोबिबेन रबारी ने वर्ष 1998 में रबारी महिला समुदाय में ज्वाइन किया। उस समुदाय को एक NGO फण्ड करती थी। वे चाहती थी कि इस कला की समाप्ति न हो इसके साथ ही समुदाय का नियम भी न टूटे। इसके लिये उन्होंने हरी जरि का खोज किया। यह ट्रिम और रिबन के जैसा ही रेडीमेड कपड़ो पर किया जाने वाला एक मशीन एप्लीकेशन होता है। पोबिबेन ने 6-7 वर्षो तक काम करने के बाद कुशन कवर, रजाई तथा कपड़ो पर डिजाइन बनाना आरंभ किया। इस कार्य के लिये उन्हें महीने में मात्र 300 रुपये दिया जाता था।

पोबिबेन की शादी 18 वर्ष की उम्र में कर दी गई। उनके जीवन में बदलाव उनकी शादी के बाद से आया। उनकी शादी में कुछ विदेशी मेहमान भी आये। विदेशी मेहमानों ने पोबिबेन के द्वारा बनाये गये बैग्स को देखा जिसने उन्हें अपनी ओर काफी आकर्षित किया। पोबिबेन ने उन मेहमानों को तोहफा के रूप में बैग्स देने का निश्चय किया। विदेशी मेहमान जो बैग लेकर गये उसे पोबी बैग के नाम से पहचान मिली उसके वह वह इन्टरनेशनल लेवल पर मशहूर हो गया।

business of pobiben

पोबिबेन ने बताया कि उनके पति उनके काम की काफी सराहना करते हैं। इसके साथ ही गांव की महिलाओं के लिये अच्छा करने के लिये हमेशा प्रोत्साहित भी करते हैं। 5 वर्ष बाद उन्होंने अपने जीवन में एक नया कदम उठाया। वह प्रदर्शनकारियों में हिस्सा लेने लगी तथा अपने हुनर को निखारते गईं। उनके अंदर पहले की अपेक्षा अधिक साहस और आत्मविश्वास भर गया। कुछ वक्त बाद उन्होंने गांव की औरतों के साथ मिलकर काम करना आरंभ किया। उसके बाद पोबिबेन डॉट कॉम की शुरुआत हुईं। उन्हें पहला ऑर्डर अहमदाबाद से 70 हजार रुपये का मिला था। उसके बाद गुजरात सरकार की तरफ से भी ग्रांट मिला।

पोबिबेन की टीम में 60 महिला करीगर है। वे 25 अलग-अलग प्रकार के डिजाईन्स बनाने का कार्य करती । पोबिबेन के वेबसाइट का टर्न ओवर 20 लाख रुपये है। वर्ष 2016 में पोबिबेन को ग्रामीण इंटरप्रन्योर के लिये जानकी देवी बजाज पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है।पोबिबेन के द्वारा बनाये गये अनेक बैग्स कई बॉलीवुड और हॉलीवुड में देखने को मिलते हैं। वह अपने गांव के अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में लगीं हुई हैं। पोबिबेन ने बहुत सारी रबारी महिलाओं की जिंदगी बदल दिया है। उन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ परिवार की कमाऊ इन्सान भी बनाया है। पोबिबेन का सपना है कि उनका वेबसाइट उस ऊंचाई तक पहुंचे जिसके माध्यम से लगभग 500 महिलाएं जुड़ सकें और अपने पैरों पर खड़ी हों।

The Logically पोबिबेन के द्वारा किये गये कार्यो की बेहद सराहना करता है।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

6 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

सबसे लोकप्रिय