Sunday, December 5, 2021

टैग त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां बसते हैं ब्रह्मा , विष्णु और महेश ! देखने के लिए उमङती है भीङ !

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग को आद्य ज्येतिर्लिंग भी कहा जाता है । यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर तीन पहाड़ियों ब्रह्मगिरी, नीलगिरी और कलगीरी के बीच स्थित है। ब्रह्मगिरी पर्वत से गोदावरी नदी बहती है। पहाड़ियों के बीच में अवस्थित होने के कारण यह धाम भक्तों के पसंदीदा धामों में से एक है । आस्था का अविरल प्रवाह यहाँ हमेशा देखा जा सकता हेै ।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में तीन बार पूजा की जाती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में तीन छोटे- छोटे लिंग ब्रह्मा, विष्णु और शिव दिखाई देते हैं। यह इस ज्योतिर्लिंग की प्रमुख विशेषता है जो भक्तों को भावों से भर देता है और लोग यहाँ आने को हमेशा तत्पर होते हैं ।

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शुरूआत में इस मंदिर का निर्माण पेशवा बालाजी बाजीराव तृतीय जी ने करवाया था। यह मंदिर काले पथरों से बना हुआ है। इस मंदिर के पूरब की ओर चौकोर मंडप है। इस मंदिर के चारों तरफ से द्वार है। ऐसा माना जाता है कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पश्चिमी द्वार को छोड़ कर बाकी तीन द्वार से अंदर जा सकते हैं और भगवान शिव जी का दर्शन कर सकते हैं। पश्चिमी द्वार को महत्व पूर्ण अवसरों पर खोला जाता है।

त्र्यंबकेश्वर में नीलगिरी की पर्वत पर निलांबिका, नीलकंठेश्वर और भगवान दत्तात्रेय का भी मंदिर है। त्रंबकेश्वर धाम में हजारों की भीड़ में श्रद्धालु भगवान शिव का दर्शन करने आते हैं। यहां देश- विदेश से भी श्रद्धालु लोग आते हैं। और भगवान शिव की आराधना करते हैं। त्र्यंबकेश्वर धाम में महाशिवरात्रि और श्रावण में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। श्रद्धालु लोग सुबह में स्नान कर के भगवान शिव जी का पूजा- अर्चना करते हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में एक खास कालसर्प योग और नारायण नागबली नामक पूजा की जाती है। जिसके कारण यहां सालों भर श्रद्धालु आते रहते हैं।

आस्था को पूर्णतः समेटे हुए यह भगवान शिव का धाम श्रद्धालुओं के लिए बेहद पावन तीर्थ स्थल है । ऐसी मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से भगवान शिव खुश होते हैं और उनकी सभी मुराद पूरी करते हैं ।