Wednesday, October 21, 2020

मुफ्त एम्बुलैंस सेवा देकर 5000 से भी अधिक लोगों को सड़क दुर्घटना से ज़िन्दगी दे चुके हैं, मिल चुका है पद्मश्री सम्मान

आज के आधुनिक युग में सड़क दुर्घटना आम बात हो गई है। लोगों की लापरवाही के कारण आए दिन सड़कों पर कई लोग दुर्घटना के शिकार हो जाते है। अनेकों लोगों को मौ़के पर ही अपनी जान तक गंवानी पर जाती है, वहीं कई लोग सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण भी अपनी ज़िंदगी की जंग हार जाते है। अक्सर कई लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता है, नाही समय पर हर जगह एम्बुलेंस उपलब्ध होते है और ना हीं पुलिस। हां वहीं कुछ लोग मदद करने के लिए मसीहा बन कर भी आते है जो दूसरों को जीवन भी प्रदान करते है। एक ऐसे ही मसीहा के स्वरूप हैं सुब्रतो दास जो अब तक 5000 से भी ज्यादा लोगों को जीवनदान दे चुके हैं। आईए जानते हैं सुब्रतो दास के बारे में कि किस तरह उन्होंने सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को जिंदगी दी…

खुद के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद आई दूसरों की मदद करने की प्ररेणा

साल 1999 में सुब्रतो दास (Subroto Das) ख़ुद एक दुर्घटना के शिकार हो गए थे, उनके चेहरे 33 ज़ख्म लगे थे। वे सड़क पर खून से लथपथ पड़े राहियों से मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने मदद नहीं की। रात का समय था जोरदार बारिश भी हो रही थी खून भी इतना बह रहा था कि खून और बहते पानी में फर्क समझना भी मुश्किल लग रहा था। अकेले दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की कोई सुध लेने वाला नहीं था तभी सुब्रतो सेन ने सोचा  कि मैं इस असहाय स्थिति से जल्द ही निपटकर लोगों की मदद करूंगा। जिससे दुर्घटनग्रस्त लोगों के जीवन बचाया जा सके, जिस परेशानी से मुझे गुजरना पड़ा मेरे सामने वह परिस्थिति किसी और की नहीं होगी और शुरू हुआ मदद का सिलसिला।

दुनिया की पहली आपातकालीन सेवा की शुरुआत

अपने साथ घटित घटना से सुब्रतो को नया जन्म तो मिला ही साथ हीं उनका जीवन भी परिवर्तित हो गया। वे सड़क दुर्घटनाग्रस्त लोगों के मसीहा बन गए। साल 2002 में सुब्रतो सेन ने देश की पहली आपातकालीन मेडिकल सेवा की शुरुआत की। उससे पहले पुणे में सिर्फ एक ही कार्डिक(हृदय संबंधी) आपातकाल के लिए ही एम्बुलेंस की सुविधा थी। लेकिन सुब्रतो दास ने एक गैर सरकारी संगठन(NGO) “लाइफलाइन फाउंडेशन” (Lifeline Foundation) की शुरुआत अहमदाबाद-सूरत राष्ट्रीय राजमार्ग से किया। धीरे-धीरे इनकी सेवा महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल और पश्चिम बंगाल राज्यों में कुल 5000 से भी अधिक लोगों तक विस्तृत होते गई। साल 2002 में एक नंबर 9825026000 जारी किए जिसपर किसी भी तरह के दुर्घटनग्रस्त मामले में कोई भी संपर्क कर सकता है।


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कौन बचाया सुब्रतो दास की ज़िन्दगी?

अगस्त 1999 में जब सुब्रतो की दुर्घटना हुईं तब वे अपने मित्र और पत्नी के साथ कार से वापस अपने घर लौट रहे थे। रात करीब 1:30 बजे की घटना है कार चलाते हुए उनके दोस्त को झपकी आईं और कार एक पेड़ से टकराकर गड्ढे में गिर गई। वह एक भयावह दृश्य था, सुब्रतो को बहुत ज्यादा चोट आई थी गाड़ी का शीशा टूट कर उनके चेहरे पर लग गया था। कार में सवार अन्य लोगों को भी चोट लगी थी लेकिन उनकी हालत कुछ ठीक थी फिर भी वे लोग चलने की अवस्था में नहीं थे। अगले 4 घंटे तक वे लोग अन्य गाड़ी वाले और राहियों से मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं रुका। आगे एक दूधवाला साइकिल से जा रहा था वह उनकी मदद के लिए कदम बढ़ाया, उसने एक बस को रुकवा कर उनकी मदद की। तभी से सुब्रतो ने निर्णय लिया की जिस परिस्थिति से उन्हें गुजरना पड़ा वह परिस्थिति किसी और को ना झेलनी पड़े।

108 नंबर की हुईं शुरुआत

सुब्रतो दास बिना ज्यादा पूंजी निवेश किए उन अस्पतालों से संपर्क किए जो दुर्घटना स्थलों के लिए आपातकालीन वाहन मुहैया करवाते हैं। धीरे-धीरे एक नेटवर्क बनता गया और घटनास्थल पर एंबुलेंस भेजने का कार्य शुरू हुआ इससे दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति अस्पताल तक आसानी से पहुंचने लगे। लेकिन सुब्रतो का सपना राष्ट्रीय आपातकाल सेवा उपलब्ध करवाने का था, जिसका एक ऐसा सार्वजनिक नंबर हो कि कोई जरूरतमंद व्यक्ति उपयोग कर सकें। इसी विचार से गुजरात मेडिकल सेवा अधिनियम 2007 बनाया गया, जिसके तहत 108 नंबर की शुरुआत हुई जो दुर्घटना पीड़ित व्यक्तियों के लिए आपातकालीन नंबर है। सुब्रतो दास का एनजीओ सरकार को तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है। आगे उन्होंने यह सेवा दूसरे राज्यों में भी शुरू करने की योजना बनाई और आज भारत के 26 राज्यों में 108 हेल्पलाइन नंबर काम कर रही है।

स्मार्ट सिटी बनाने के प्रयास में सुब्रतो दास 40% बङोदरावासियो (Vadodara) को CPR (हृत्फुफ्फुसीय पुनर्जीवन) तकनीक के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं जिससे हृदयाघात वाले मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले मदद मिल सके। सुब्रतो दास के अनुसार अबतक वे 3500 से भी अधिक गंभीर मामले वाले दुर्घटनाग्रस्त और साथ ही 5000 से भी अधिक घायल लोगों के जिंदगी भी बचाए है। साल 2017 में सुब्रतो सेन को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित भी किया गया।

आज के आधुनिक युग में मानवता शर्मसार होते जा रही हैं वहीं सुब्रतो सेन की द्वारा समाजहित में किया गया कार्य प्रशंसनीय है, जिसका अनुसरण हम सबको करना चाहिए। The Logically हजारों घायल जिंदगियों को पुनः सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सुब्रतो दास और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को नमन करता है।

Anita Chaudhary
Anita is an academic excellence in the field of education , She loves working on community issues and at the same times , she is trying to explore positivity of the world.

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