Friday, January 22, 2021

सुपर-30 में पढ़ने के बाद IIT निकाल लिए, नौकरी नही की और बच्चों के लिए गांव में मुफ्त स्कूल खोल डाला

सुपर 30 बिहार की राजधानी पटना की एक निःशुल्क IIT प्रशिक्षण संस्थान है। इसकी स्थापना 2002 में “आनंद कुमार” गरीब परिवार के बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए किये। आज की इस कहानी में हम आपको एक मजदूर परिवार के लड़के के बारे में बताएंगे, जो घर-घर ट्यूशन पढ़ाने के बाद मेहनत कर आईआईटी-बीएचयू में चयनित हुआ। लगन और परिश्रम से पढ़ाई में अव्वल आने के बाद अच्छी कंपनी में नौकरी भी मिली, लेकिन उसे छोड़ अपने गांव में निःशुल्क स्कूल की स्थापना कर गरीब बच्चों को बेहतर कल देने का निश्चय किया। इनका नाम है “सुजीत कुमार”।

सुजीत कुमार

सुजीत कुमार (Sujit Kumar) का जन्म कोशी नदी के किनारे स्थित मधेपुरा जिले में हुआ। यहां के लोगों का भरण-पोषण करने का रास्ता मात्र खेती ही था। कभी-कभी नदियों के पानी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ में फसल बर्बाद हो जाती तो कभी सूखा के कारण। सुजीत के पिता अनपढ़ थे जिस कारण उन्हें मजदूरी और बोरी ढ़ोने के अलावा कोई काम नहीं मिलता। इसी काम को कर वह अपने परिवार की रोजी-रोटी का गुजारा करते। सुजीत भी घर की हालत देख पिता का हांथ बटाने के लिए आगे आयें, लेकिन मां नहीं चाहती थी कि वह भी अपने पिता की तरह जीवन बसर करें।

मां ने पढ़ाई में किया समर्थन

सुजीत की मां इन्हें पढ़ाना चाहती थी। इसलिए इनका दाखिला गांव के सरकारी स्कूल में कराई। जैसे कि सरकारी स्कूलों की स्थिति हम बहुत अच्छे से जानते हैं। वही स्थिति सुजीत के स्कूल की भी थी। देखते ही देखते सुजीत चौथी क्लास में चले गये और पढ़ना चाहने लगें लेकिन शिक्षकों ने कोई मदद नहीं किया। उनको अपने सवालों के जवाब के लिए काफी इंतजार करना पड़ता। फिर भी निराश होकर ही लौटते। शिक्षकों का बर्ताव उन्हें अच्छा नहीं लगता जिससे वह पढ़ाई छोड़कर घर खर्च के बारे में सोचने लगे। फिर सुजीत को उनके गांव के एक वृद्ध व्यक्ति ने पढ़ाई के महत्व को समझाया और वे सुजीत की सहायता के लिए आगे भी आयें। उनकी सलाह और मां की आज्ञानुसार सुजीत ने दुबारा से पढ़ाई आरम्भ कर दी।

10वीं में आयें अच्छे अंक

Sujit घर की स्थिति देख “नवोदय विद्यालय” की तैयारी शुरू किये। लेकिन पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था नहीं होने के कारण वह असफल हुयें। इनके पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर बोरी ढ़ोने का काम करने लगें। सुजीत ने हार नहीं मानी और 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इन्हें गणित और विज्ञान विषय बहुत पसंद थे। इसलिए इन्हें इन विषयों में अच्छे अंक प्राप्त हुयें और 10वीं की पढ़ाई में सफलता हासिल कर अपने परिवार को खुश कर दियें। सुजीत इंजीनियरिंग करना चाहते थे लेकिन पैसों की तंगी के कारण वह पटना (Patna) आ कर रहने लगें।

Source-NDTV

घर-घर घूम बच्चों को पढ़ाया ट्यूशन

अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह पटना में बच्चों को घर जा कर होम ट्यूशन देने लगे। होम ट्यूशन से उन्हें जो भी पैसा मिलता, उससे वह किताब कॉपी खरीदते और पढ़ाई करते। जब उन्हें सुपर 30 (Super 30) के बारे में पता चला कि वहां गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है, तो उन्होंने आनंद सर के पास मदद मांगी। सर ने उन्हें अपने संस्थान का हिस्सा बना लिया।

सुजीत ने अच्छी कंपनी की नौकरी छोड़ निःशुल्क विद्यालय की स्थापना की

सुजीत ने अपने लगन से IIT-BHU की परीक्षा पास कर उसमें चयनित हो गये। उन्होंने अपनी पढ़ाई खत्म की और उनकी काबिलियत के अनुसार उन्हें एक अच्छी कंपनी में नौकरी प्राप्त हुई। थोड़े समय पश्चात नौकरी छोड़ने का फैसला लियें और एक निःशुल्क विद्यालय की स्थापना करने के साथ खुद एक प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षक बन बच्चों को पढ़ाने लगें।

एक गरीब परिवार में जन्म लेने के उपरांत भी जिस तरह से सुजीत ने अपने सपने को साकार कर शिक्षा के महत्व को समझा और गरीब बच्चों के लिए निशुल्क स्कूल की स्थापना की। इन सब कार्यों के लिए The Logically Sujit की सराहना करता है। साथ ही अपने पाठकों से अपील करता है कि वह भी गरीब बच्चों को शिक्षा देने में मदद करें।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

1 COMMENT

  1. […] बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज गांव में जन्मे अमित कुमार दास ने कुछ ऐसा ही साहसिक कदम उठा कर युवाओ के लिए एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है।अमित का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था जहाँ की घर के हर लड़के बड़े होकर खेती का ही काम करते थे। लेकिन अमित कुछ अलग करना चाहते थे। उनका सपना था एक इंजिनीयर बनने का। लेकिन परिवार की माली इस्थिति ठीक न होने के कारण ऐसा संभव नही था। […]

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