Thursday, August 18, 2022

पौधों के बारे में इतनी जानकारी है कि , लोग इन्हें पर्यावरण का एन्सिक्लोपीडिया कहते हैं

“पर्यावरण” प्रकृति द्वारा प्रदत्त सबसे अनमोल उपहार जिसके बिना जीवन की परिकल्पना की हीं नहीं जा सकती है । आज हम एक ऐसे पर्यावरणविद् की कहानी आपसभी के बीच प्रस्तुत करने जा रहे हैं जिन्हें जंगल का “Encyclopedia” कहा जाता है ।

कर्नाटक के होनाली गांव की रहने वाली 74 वर्षीय महिला तुलसी गौड़ा जिनका जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ था । उनके पिता की मृत्यु उनके जन्म के कुछ साल बाद हीं हो गई थी जिस कारण बहुत कम उम्र में हीं उन्हें अपनी माँ के साथ काम करने जाना पड़ता था । जिसके कारण वो पढाई से विमुख रहीं । लेकिन उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधे लगाने का व उनकी देखभाल करने का शौक था । वो पेड़-पौधों के बीच हीं अपना ज्यादातर समय व्यतीत करती थी ।

फोटो साभार : इंटरनेट

तुलसी गौड़ा पढ़ी-लिखी नही थी , ना ही कभी स्कूल गई , ना ही पेङ-पौधों से संबंधित कोई प्रशिक्षण प्राप्त किया लेकिन उनके द्वारा लगाए गए हर पौधे की गहरी जानकारी उन्हें होती थी । पौधे के बारे में उनकी जानकारी एक वनस्पति वैज्ञानिक से कम नही थी । जिसके कारण कई राज्यों के युवा इनसे पेड़-पौधों के बारे में सीखने आते हैं । उनके गांव वाले बताते हैं कि वे वैसे पौधे ज्यादा लगाती थी जो घने और लंबे होते थे तथा उनके द्वारा लगाया एक भी पौधा सूखता नही था जिसके कारण वहां के वन अधिकारियों ने इन्हें जंगल में सरकार के तरफ से पौधरोपण का जिम्मा सौंप दिया । वे लोग इनके कार्य से इतने प्रभावित हुए कि बिना पढ़ी-लिखी , बिना कोई डिग्री वाली तुलसी गौड़ा को फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में स्थायी नौकरी दे दी । जिसके बाद इन्होंने 14 वर्ष तक वहीं नौकरी किया तत्पश्चात सेवानिवृत्त हो गई ।

पिछले 6 दशक में तुलसी गौड़ा 1 लाख से भी अधिक पेड़-पौधे लगा चुकी हैं और हरेक पौधों का देखरेख वो एक छोटे बच्चे की तरह करती आई हैं जब तक कि वो पौधा बड़ा न हो जाये । रिटायरमेंट के बाद भी वो अपना जीवन पौधा रोपण तथा उसे संरक्षित करने में व्यतीत कर रही हैं । वो कहती हैं कि वे जीवन के अंतिम क्षण तक पौधों की देखभाल करते रहना चाहती हैं ।

पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए उन्हें भारत सरकार की ओर से इसी साल पद्मश्री से सम्मानित किया गया है । इसके अलावा उन्हें प्रतिष्ठित इन्दिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र अवार्ड , राज्योत्सव अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है ।

जीवन के इस पड़ाव में भी तुलसी गौड़ा द्वारा पर्यावरण को संरक्षित करने का यह जुनून आने वाले अनेकों वर्षों तक हम सभी को प्रेरित करता रहेगा । Logically तुलसी गौड़ा व उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों को नमन करता है ।