Sunday, September 19, 2021

इस सरकारी शिक्षक के मात्र 6 सालों में 7 तबादले हुए हैं, जहां भी जाते हैं स्कूल की तस्वीर बदल देते हैं: प्रेरणा

हम अपनी जिंदगी में जिससे भी कुछ सीखते है, वे सभी हमारे शिक्षक हैं। किसी के बच्चे के पहले गुरु उनके माता-पिता हैं। अगर मां पढ़ी-लिखी है तो वह बच्चे को बहुत सारी जानकारियां दे सकती है और पढ़ाई में उसकी काफी मदद भी करती है। बच्चे के बोलचाल और हाव-भाव से ही पता चल जाता है कि बच्चा संस्कारी और शिक्षित परिवार का लड़का है। हालांकि आजकल बच्चे छोटी आयु में ही स्कूल जाना प्रारंभ कर दे रहे हैं। जिस कारण उनमें यह सारी विशेषताएं देखने को मिल रही है। फिर भी अगर मां शिक्षित है तो वह अपने बच्चे को स्कूल से मिले होमवर्क में मदद करती है, जिससे बच्चे का मनोबल हमेशा बड़ा रहता है और उसे अपने वर्ग में सम्मान प्राप्त होता है।

सरकारी स्कूल में शिक्षक, स्कूल के दौरान कुछ ऐसे भी पाए जाते हैं जो महज़ अपनी तनख्वाह के लिए स्कूल जाते हैं। कुछ शिक्षक ऐसे भी होते हैं जिनके पास जो भी ज्ञान है, वे चाहते हैं कि उनका विद्यार्थी ग्रहण करें और आगे चलकर जब वह सफलता हासिल करे तो वे फक्र से कह सकें, यह मेरा विद्यार्थी है। छात्र भी कह सकें कि मेरी सफलता के पीछे मेरे शिक्षक का बहुत बड़ा योगदान है। आज की एक कहानी एक ऐसे शिक्षक की है जो जिस भी स्कूल में गयें हैं वहां की पूरी कायापलट कर रख दियें हैं। 7 सालों में उनका तबादला 6 बार हुआ है। उन्होंने हर जगह ऐसा नायाब काम किया है, कि वह सभी शिक्षक के लिए उदाहरण बन गए हैं।

अगर मन में किसी काम को करने की लगन और जज़्बा हो तो हम विषम परिस्थितियों का सामना भी आसानी से कर सकते हैं। अपनी सुंदरता की मिसाल पेश कर रहे हैं सीकर शहर में स्थित हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले “विवेक जागीर“। इनसे हर शिक्षक को प्रेरणा मिल रही है।

इनका तबादला 7 सालों में शहर के 6 स्कूलों में हुआ है। इन्होंने सीकर से लेकर अजमेर व बाड़मेर, राजसमंद तक के स्कूलों को इस कदर बदल दिया है कि देख कर यह नहीं लगता है कि यह सरकारी स्कूल है। अगर हम सरकारी स्कूल की बात करें तो उसकी स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वहां बच्चों को अच्छी शिक्षा ग्रहण करा सकें, या फिर किसी भी प्रतियोगिता के लिए उन्हें तैयार किया जा सकें। यहां तक कि मिड-डे-मील के तहत भी उन्हें कुछ खास पोषण युक्त भोजन नहीं मिलता, जिससे उनकी दिमाग प्रगतिशील हो। बच्चों की पढ़ाई में बहुत सारी बाधाएं आती है। कुछ शिक्षक स्कूल में अपने सैलरी आने का वेट करते हैं, और कुछ शिक्षक मस्ती मजाक कर अपना टाइम पास करते हैं। सरकारी स्कूल में कुछ ऐसे भी शिक्षक हैं जो इनके लिए उदाहरण है। ऐसे ही हैं विवेक, इनकी जब से नियुक्ति हुई है तब से बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें बहुत सारे राज्य स्तर पर सम्मान प्राप्त हुए हैं। इन्होंने अपने स्कूल में कला प्रदर्शनी, स्टाफ ड्रेस, आर्ट गैलरी, करियर सेमिनार, विज्ञान मेले, वाटिका से लेकर स्कूल में सामूहिक कार्यक्रम के अलावा पूजा उत्सव का नवाचार भी कियें हैं।

यह भी पढ़े :-

गांव में नेटवर्क नही रहता तो शिक्षक पेड़ पर बैठाकर नोट्स डाऊनलोड कराते हैं: जहां चाह वहां राह

अभी विवेक पटना के राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में साक्षात्कार से हेडमास्टर के पद पर कार्यरत हैं। वे अपने स्कूल को राज्य का बेहतरीन और सर्वश्रेष्ठ स्कूल बनाने में लगे हैं।

विवेक को राज्य स्तर पर भामाशाह प्रेरक अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इन्होंने भामाशाह को प्रेरित किया और स्कूलों के निर्माण के लिए लगभग एक करोड़ से भी ज्यादा खर्च करवायें हैं। 2013 में जब इनकी नियुक्ति हुई तो स्कूल में ऐसे अद्भुत कार्य किए इन्हें देखकर वहां के कलक्टर ने सम्मानित किया। जब इनका तबादला अजमेर में हुआ तब इन्होंने वहां के बच्चों की प्रतिभा को सबके सामने लाते हुए पत्रिका के माध्यम से दिखाया। यह देख इसकी सराहना सौरव स्वामी ने किया। The Logically विवेक को शत-शत नमन करता है।