Wednesday, December 2, 2020

किसान माँ-बाप के नन्हे बेटे ने खेती के लिए किए अनेकों अविष्कार, राष्ट्रपति से मिल चुका है सम्मान

हमारे देश में हुनर की कमी नहीं है। हमारे युवाओं और बच्चों के पास या हर उम्र के लोगों के पास एक से एक तरकीब है। बस यही कारण है कि हमारा देश दिन प्रतिदिन सफलता के शिखर को चूम रहा है। आज हम आपको एक ऐसे लड़के के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बहुत ही अनोखे इनोवेशन किए हैं। जिस ने किसानों के लिए आसान तरकीब सोची और इसकी शुरुआत उसने अपने माता-पिता के कष्टों को देखकर की। उनका नाम है दीपांकर दास।

कौन है दीपांकर

दीपांकर अंडमान निकोबार के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 22 वर्ष है।दीपांकर शुरू से ही काफी मेहनती हैं। उन्होंने अपने माता-पिता को बहुत ही मेहनत करते हुए देखा जिससे उन्हें हमेशा यह महसूस होता था कि वह कुछ अच्छा कर सकते हैं। इसलिए पढ़ाई के साथ शुरू से ही वह पार्ट टाइम काम भी करते हैं। जिससे एक तो उनकी पॉकेट मनी निकल जाती है और दूसरी बात यह है कि वह अपने नए सोच को पंख देने का काम भी करते हैं।

माता-पिता के कष्टों ने सिखाया बहुत कुछ

दीपांकर बताते हैं कि बचपन से ही उन्होंने अपने माता-पिता को 5 से 6 किलोमीटर तक चलते हुए देखा है ताकि घर चला सके। इतनी मेहनत के बाद भी दो वक्त की रोटी बहुत मुश्किल से मिलती थी और मेहनत तो खैर था।

dipankar innovations for farming

कबाड़ी में से उठाकर बनाया है बहुत कुछ

बचपन में जब दीपांकर बड़े और महंगे खिलौने नहीं खरीद पाते थे तब वह लोगों के फेंके हुए कचरो को चुनकर या उसमें से कोई काम की चीजों को निकालकर वह खुद ही अलग-अलग तरीके का सामान बनाते थे। मशीन और ऐसी चीजों से खेलने और उन्हें समझने का शौक तो बचपन से ही था जिसने आगे चलकर एक बड़ा रूप ले लिया।

वह हमेशा से चाहते थे कि वह कुछ ऐसा करें अपनी जिंदगी में ताकि उनके माता-पिता के कष्ट कम हो जाए और उन्हें बहुत दूर काम करने के लिए या घर चलाने के लिए ना जाना पड़े।

मां दूर से पानी भर कर लाती थी तो बना डाला-

दीपावली अपनी मां को दूर दूर से पानी लाते हुए देखा जो कि काफी भारी हो जाता थाl इस समस्या के हल के लिए उन्होंने एक ट्रॉली बना दी और ना ही सिर्फ अपने मां के लिए बल्कि गांव की और भी औरतों के लिए बनाई। इससे पानी ले आना ले जाना काफी आसान हो गया। इससे भारी से भारी चीज उस पर रखकर और सिर्फ पहिए के द्वारा उसे खींचकर लाया जा सकता था।

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गांव के मछुआरों की समस्याओं का भी किया समाधान

दीपांकर देखते थे कि उनके गांव के जो मछुआरे थे उन्हें मछली को कुछ दिन बीतने पर बहुत कम दाम में बेचना पड़ता था क्योंकि स्टोरेज की सुविधा वहां पर उपलब्ध नहीं थी। इसी चीज को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वहां पर एक डीप फ्रीजर बना डाली जिसके द्वारा अब मछुआरे अपने मछलियों को वहां रख सकते थे और वह ताजी रह पाती। यही नहीं इसके साथ उन्होंने हैंड वॉशिंग सिस्टम और नारियल को आसानी से तोड़ने का एक मशीन भी बनाया। तो आप देख सकते हैं कि यह कितने इनोवेटिव शुरू से ही रहे हैं जो इतनी कम उम्र में लोगों की समस्याओं का समाधान करते जा रहे थे।

दाल की harvesting को भी किया आसान

दीपांकर ने कहा कि जब भी डाल के हार्वेस्टिंग का समय आता था तो उनके माता पिता के हाथ जल जाते थे और बाकी किसानों के भी। इसमें काफी मेहनत भी था और समय भी काफी ज्यादा लगता था। गांव के लोगों के लिए थ्रेशर मशीन खरीदना बहुत ही मुश्किल था क्योंकि यह बहुत महंगा आता था पूर्णविराम इसी चीज को ध्यान में रखते हुए दीपांकर इन्हें बना डाला एक सोलर पावर थ्रेसर मशीन जिससे इस समस्या का भी समाधान हो गया।

dipankar got award

2013 में ही शुरू किया ट्रायल लेकिन प्रसिद्धि मिली 2015 में

वैसे तो दीपांकर ने 2013 में ही इस मशीन को तैयार कर लिया था। और वह अपने मां-बाप के साथ ही इसका ट्रायल भी करते रहे। लेकिन 2015 में उन्हें एक मौका मिला जिसमें उन्होंने अपने मशीन को model National innovation foundation के इग्नाइट अवार्ड के लिए भेजाl आपको बता दें कि इनका चुनाव वहां हो गया और इन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गयाl

एन आई एफ के द्वारा इंडोनेशिया भी गए

आगे चलकर दीपांकर को मौका मिला एन आई एफ़ की तरफ से इंडोनेशिया जाने का जहां पर उन्होंने अपने सोलर thriller मशीन का प्रदर्शन किया l यही नहीं दीपांकर ने प्रोफेसर अनिल गुप्ता के संयोग में या कहे तो उनके मार्गदर्शन में उस सोलर थ्रिलर्स पर और इनोवेशन किया और उसे बड़े स्तर पर बनाया। इसी क्रम में उन्होंने धान ड्रायर का भी इनोवेशन किया और लगे रहे।

हनी बी के फाउंडर ने सहयोग करने का किया फैसला

दीपांकर के अद्भुत प्रयासों और इनोवेशन को देखते हुए हनी बी के फाउंडर ने उन्हें सहयोग करने का फैसला किया। सभी ने जाना कि आर्थिक अभाव के कारण दीपांकर ने बहुत ज्यादा पढ़ाई नहीं की उन्होंने दसवीं के बाद डिप्लोमा चुना।

प्रोफेसर गुप्ता ने कराया अहमदाबाद में एडमिशन

आज प्रोफेसर गुप्ता की मदद से दीपांकर अहमदाबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके साथ ही वह एनआईएफ के साथ भी जुड़े हुए हैं। दीपांकर आज पढ़ाई के साथ साथ अलग-अलग चीजों पर शोध कर रहे हैं और चीजों को आसानी से लोगों तक पहुंचाने की खोज कर रहे हैं।

The Logically दीपांकर के अच्छे भविष्य की कामना करता है और आशा करता है कि आगे भी वह अलग अलग तरीके के इनोवेशन करते रहेंगे और लोगों की समस्याओं का समाधान निकालते रहेंगे।

अंजली
अंजली पटना की रहने वाली हैं जो UPSC की तैयारी कर रही हैं, इसके साथ ही अंजली समाजिक कार्यो से सरोकार रखती हैं। बहुत सारे किताबों को पढ़ने के साथ ही इन्हें प्रेरणादायी लोगों के सफर के बारे में लिखने का शौक है, जिसे वह अपनी कहानी के जरिये जीवंत करती हैं ।

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