Wednesday, December 2, 2020

मैट्रिक में ही पढाई छोड़ने वाले इस बिहारी लड़के ने अपने अविष्कार से ऐप्पल और सैमसंग जैसी कम्पनियों को पीछे छोड़ा

अगर इंसान को अपने सपने और खुद पर यकीन हो तो उसकी उम्र और डिग्री मायने नही रखती। पूरी दुनिया की बातों से बेखबर वह सिर्फ अपने सपने को देखता हैं। कुछ इसी तरह के जुनून से भरे हुए सिद्धांत वत्स(siddhant vats) ने कम उम्र ही वह कर दिखाया जो बड़े -बड़े लोग सोचे रह जाते हैं। 17 वर्ष की उम्र में कितने तो यही नही समझ पाते कि उन्हें आगे करना क्या हैं। तो वही सिद्धांत वत्स(siddhant vats) अपने सपने को लेकर निश्चिन्त थे और उसे पूरा करने में जुट गए थे। सिद्धांत उन लोगो मे से हैं जो यह यकीन करते है कि बिना कुछ किये कुछ भी हासिल नही हो सकता।

सपने को जीने की शुरुआत

17 साल की उम्र में पटना के इस लड़के ने अपूर्व सुकान्त(apurva sukant) और दो अन्य दोस्तों के साथ मिलकर एंड्रोइडली सिस्टम(androidly system) की शुरुआत की। इसके लिये उन्होंने अपने हाई स्कूल की पढाई दो सालों के लिए छोड़ दी। सिद्धांत बताते है कि उनके इस निर्णय से उनका परिवार आश्चर्य में था और आज भी हैं।

siddhant vats

एंड्रोइडली स्मार्टवाच (Androidly smartwatch)

सिद्धांत और उनके दोस्तो ने मिलकर दुनिया की पहली स्मार्ट वाच का निर्माण किया। इसका नाम एंड्रोइडली(androidly) हैं। यह स्मार्टफोन, कंप्यूटर और जीपीएस डिवाइस का सम्मलित रूप हैं। इससे आप वो सारे काम कर सकते है जो एक स्मार्ट फ़ोन से किया जा सकता हैं। कमाल की बात ये है किं जहां गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों ने स्मार्टवाच बनाने की घोषणा की उसी के कुछ दिनों बाद इन्होंने स्मार्टवॉच लॉन्च कर दिया।

यह भी पढ़े:- दिव्यांग होने के बावज़ूद भी खड़ी की खुद की कम्पनी, मात्र 10 रुपये से शुरू कर आज 400 करोड़ के मालिक हैं

फलक फाउंडेशन(Falak foundation)

सिद्धांत के माँ द्वारा शुरू किया गया यह NGO समाज में अलग-अलग तरह से लोगो की मदद करता हैं। सिद्धांत जब सातवी कक्षा में थे तब से ही NGO में अपनी सेवा दे रहे हैं। सातवी कक्षा से ही इन्होंने बच्चो को कंप्यूटर, अंग्रेज़ी और गणित का ज्ञान देना शुरू किया। यह NGO के द्वारा ब्लड डोनेशन कैम्प और हेल्थ चेकउप कैम्प लगाते हैं।

सम्मान और अवार्ड

कम उम्र में इतना कुछ हासिल करने पर सिद्धांत वत्स को 2015 में प्रतिष्ठित लार्ड बेटन पावेल नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वो TEDx में स्पीकर के तौर पर शामिल हो चुके हैं। बेलफ़ास्ट में सिद्धांत ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। होरासिसग्लोबल बिज़नेस में यह सबसे कम उम्र के स्पीकर थे।

siddhant vats

आगे की योजना

वर्तमान में सिद्धांत लन्दन में पढ़ाई कर रहे हैं। भविष्य की योजना के बारे में वह बताते है उनका मन बोधगया में एक अंतरराष्ट्रीय मठ बनाना का हैं। इससे फॉरेन इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा साथ ही बिहार पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा

सच मे सिद्धांत जैसे युवा आज उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो सिर्फ किताबी ज्ञान के पीछे भागते!

The Logically के लिए इस कहानी को मृणालिनी द्वारा लिखा गया है। बिहार की रहने वाली मृणालिनी अभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती हैं और साथ ही अपने लेखनी से सामाजिक पहलुओं को दर्शाने की कोशिश करती हैं!

News Desk
तमाम नकारात्मकताओं से दूर, हम भारत की सकारात्मक तस्वीर दिखाते हैं।

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