हम खेती करने के लिए बहुत सारी तकनीकों को अपनातें हैं। हम यह जानते हैं कि आज के समय में जैविक विधि, हाइड्रोपोनिक्स विधि, टिशू कल्चर विधि और अन्य कई विधियों से खेती की जा रही है, जिससे बहुतायत मात्रा में लाभ हो रहा है। जैविक विधि से की गई खेती से उगाये गए फसलों के भोज्य से हमें किसी प्रकार की हानि नहीं होती। वैसे तो इन सारी विधियों के बारे में हम पहले भी अपने लेख के जरिए बता चुके हैं।

आज हम आपको हॉट्रिकलचर (Horticulture) के विषय में बताएंगे। यह पद्धति क्या है?? कैसे इसका उपयोग करना है??

Horticulture का मतलब ” औद्यानिकी या उद्यान विज्ञान” है। इस विधि के जरिये हम फल, फूल, सब्जियों, और मसालों के पौधों को बिना मिट्टी के अपने घर की दीवार पर उगाया जा रहा है। आप भी यह कार्य कर सकते हैं और ताजी सब्जियों को अपने खाने में शामिल कर सकते हैं। दीवार पर सब्जी उगाने के दौरान आपको दीवार पर सीलन की प्रॉब्लम भी नहीं होगी।

किचन में कम होगा लागत

ICAR ( Indian Council of Agricultural Research) ने इस तकनीक को तैयार किया है। इससे हमें कई तरह के फायदें हैं। जैसे एक तो ताजी सब्जियां खाने को मिलेंगी। दूसरा हमारा मन लगेगा और हम स्वस्थ्य महसूस करेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर हमारे पास खाली जमीन नहीं है, ना ही बालकनी है, तो हम दीवार पर इस पद्धति के माध्यम से सब्जी को उगा सकते हैं, वह भी जैविक विधि से। इससे हमारे किचन का खर्चा भी कम आयेगा। तो आप खुद समझते हैं कि यह कितना लाभदायक है। वैसे तो हर व्यक्ति चाहत है कि ताजी और जैविक खाद के माध्यम से उगाई सब्जियों को खाये। इसके लिए यह जरूरी है कि हमारे पास जमीन होना चाहिए। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो मन बहुत उदास हो जाता है। इसीलिए इस तकनीक से कोई भी व्यक्ति अपने घर पर अपने मनपसंद कई प्रकार की सब्जियों को उगा सकता है।


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कैसे उगायें सब्जियां

Central Institute for Subtropical Horticulture के साथ मिलकर ऐसे मिश्रण का निर्माण हुआ है जो मिट्टी की अपेक्षा बहुत ही उपयोगी है। इस मिश्रण में कोकोपीट, परमालाइट और वर्मीकुलाइट को PVC के पाईप को काटकर एक ढाँचा बनाया जाता है, उसमें इस मिश्रण को मिला दिया जाता। यह मिश्रण हल्का और बेहद उपयोगी है इस वजह से इसे कहीं भी रखकर या दीवार पर आसानी से सब्जी उगा सकतें हैं।

दीवार को नहीं है खतरा

वैज्ञानिक डॉ. S.R. सिंह ने यह जानकारी दी कि लोग अपने दीवारों को डेकोरेट करते हैं वह भी सजावटी पौधों से, जो प्लास्टिक के बर्तनों के माध्यम से उगायें जातें हैं। वहीं सब्जियों को उगाने में ऐसा कुछ नहीं किया जाता। इस कन्टेनर का निर्माण ऐसे हुआ है कि इसे दीवार के सहारे खड़ा कर इसमें सब्जियों को लगाया जाता है। इससे एक फायदा है कि मिट्टी दीवार में नहीं लगता। फिर दीवार में सीलन पड़ने की दिक्कत भी नहीं रहती है। इस प्रकार की खेती के लिए हम कम स्थल में कई प्रकार की सब्जियां उगा सकते हैं। जैसे- पालक, चुकंदर, प्याज, मेथी, लहसुन, सलाद पुदीना, धनिया और कई अन्य भी।

बारिश में भी गलने का नहीं है खतरा

यह बात सही है कि अगर सब्जियों को उगाना है तो उसके लिए ठंडी का मौसम सही रहता है। ऐसे कई सारी फसलें हैं जो मौसम के अनुसार लगायें जाते हैं। लेकिन अगर कोई सब्जी हम बरसात के मौसम में लगाते हैं तो वह पानी के कारण नष्ट हो जाता है और उसके गलने का खतरा रहता है। लेकिन इस तकनीक को अपनाकर हम सब्जी को उगा रहे हैं तो कितनी भी बारिश हो सब्जियों को कोई परेशानी नहीं होगी।

The Logically इस पद्धति के निर्माण और उसके फायदे के लिए वैज्ञानिकों को सलाम करता है और अपने पाठकों से अनुरोध करता है कि वे भी इस पद्धति को अपनाकर खेती करें और ताज़ी सब्जियों का सेवन करें।

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