Sunday, December 5, 2021

अपनी खेती छोड़ शुरू किए मत्स्य पालन, अब कमा रहे हैं 80 लाख रुपये सलाना: यतीन्द्र कश्यप

कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। इन्सान की मेहनत ही उसके काम को छोटा या बड़ा बनाती है। इसके अलावा इन्सान अपनी मेहनत और सच्ची लगन से किसी भी काम को छोटा या बड़ा बना सकता है। देश में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। ऐसे में देश के नवयुवकों के लिये कृषि के क्षेत्र में नया भविष्य उभर के सामने आ रहा है। आजकल जीवन के नये दौर में रोजगार के नये-नये अवसर भी खुल रहें हैं। बहुत लोग कृषि में अपना भविष्य देख रहें हैं। वर्तमान में कृषि के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मछली पालन के भी विकल्प हैं। इन सब क्षेत्रों में भी रोज़गार की बहुत संभावनाएं है। आजकल मछली पालन एक नया रोजगार बन गया है। मछली पालन के व्यवसाय से यतीन्द्र कश्यप आज लाखों की कमाई कर रहे हैं।

आइए जानतें हैं, यतीन्द्र कश्यप के बारें में

यतिन्द्र कश्यप (Yatindra Kashyap) बिहार (Bihar) राज्य के संग्रामपुर, मोतिहारी (Motihari) के रहनेवाले हैं। मछली पालन करना यतिन्द्र कश्यप का खानदानी पेशा है। इनके घर मछली पालने का काम पुरखो के जमाने से ही होते आ रहा है। यतीन्द्र कश्यप अपने खानदानी पेशे में वर्ष 2012 से जुटे हैं। जब यतिन्द्र कश्यप इस व्यवसाय को करने लगे तो उन्हें शुरुआती दिनों में बहुत भारी नुकसान हुआ। यतिन्द्र कश्यप मछली पालन के साथ-साथ हेचरी का भी काम करते हैं। हेचरी व्यवसाय को आरंभ करने में लगभग 12 से 15 लाख रुपये का लागत आता है। हेचरी को शुरु करने के लिये यतिन्द्र ने इस व्यवसाय में निवेश किया लेकिन आरंभ के दिनों में उनकों घाटे का सामना करना पड़ा। व्यवसाय में घाटा होने के बाद यतिन्द्र ने अनुभवी लोगों से सलाह मशवरा लिया। कुछ दिनों बाद यतिन्द्र को धीरे-धीरे व्यवसाय से फायदा होने लगा। एक हेच से पैदा होने वाले मछली के बच्चें का मूल्य बाजार में 3 से 5 लाख रुपये तक हैं। एक महीने में 5 हेच कराया जाता है।

अभी भी हमारे समाज में कई कृषकों की स्थिति खराब है जिसके चलते वह अपनी जान दे देते हैं। लेकिन वहीं यतिन्द्र मछली पालन के व्यवसाय से ऐसे किसानों के लिये एक प्रेरणा बन गये हैं। बिहार के संग्रामपुर, मोतिहारी क्षेत्रों में पानी की पर्याप्त मात्रा है। लेकिन वहां के किसानों को इसकी सूचना न होने के कारण वह इस काम को नहीं कर रहे थे। यतिन्द्र के काम और मुनाफे से प्रेरित होकर वहां के किसानो और बेरोजगारों ने अपनी जमीन पर तालाब खोदकर मछली उतपादन का कार्य शुरु किया। इस काम से आज उन्हें बहुत ही अच्छी-खासी कमाई हो रही है। वे सभी आत्मनिर्भर है। यतिन्द्र (Yatindra) के काम से प्रेरणा लेकर अनेकों किसानों ने भी मछली उत्पादन के कारोबार को प्रारंभ किया हैं।

यह बात बहुत ही कम लोगों की पता होगी कि मछली पालन के लिये सरकार के तरफ से सहायता भी मिलती है। मछली पालन के लिये सरकार के तरफ से एक तालाब खुदवाने से लेकर मछली पालने लायक तैयार करने के लिये 50% आर्थिक सहायता दी जाती है। मत्स्य डिपार्टमेंट को सरकार की तरफ से अनुमति मिलने के बाद वह इस क्षेत्र में छोटे-छोटे तालाबों की खोज कर रही है। मछली उत्पादन के लिये इस क्षेत्र का मौसम और पानी बहुत ही उपर्युक्त है। यही वजह है कि यहां मछली उत्पादन का कार्य बहुत ही तेजी से आगे बढ़ रहा हैं।

यतिन्द्र कश्यप (Yatindra Kashyap) मछली पालन के व्यवसाय से आज 80 से 90 लाख रुपयों का मुनाफा कमा रहें हैं। आज वह किसानों के लिये एक नयी मिसाल बन गयें हैं।

यतिन्द्र कश्यप (Yatindra Kashyap) को मछली उत्पादन के कार्य को एक नये रोजगार का रूप देने के लिये The Logically उन्हें नमन करता है। इसके साथ ही उनके काम की तारिफ भी करता है।