Wednesday, October 21, 2020

पैसे के अभाव में दिनभर नौकरी करते थे, वक्त निकालकर पढाई करते रहे और आज एक IAS अधिकारी हैं

हमनें बहुत सी ऐसी कहानियां पढ़ी, सुनी या आस पास में देखी है जिसमें परिवार की आर्थिक स्थिति छात्र की पढ़ाई के दरम्यान आ जाती है। पारिवारिक दिक्कतों का दीवार बन कर रास्ते में आने से कुछ लोग अपने सपनों और मंजिलों से समझौता कर लेते है तो वहीं कुछ लोग इन सभी कठिनाइयों का सामना बहुत ही बहादुरी से कर अपने सपनों को पूरा करतें हैं। कुछ छात्र पीजी तक की पढ़ाई बड़े आराम से करते हैं तो कुछ 12वीं की पढ़ाई पूरी कर आगे की पढाई के साथ-साथ पार्ट टाइम नौकरी करने लगते हैं। लेकिन बात हो प्रतियोगी परीक्षाओं की तो पूरा फोकस पढ़ाई पर करना बहुत ही आवशयक है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सिविल सर्विसेज की परीक्षा को देश में सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इस परीक्षा की तैयारी करने के लिये छात्र अपना पूरा समय पढ़ाई में देने के बाद भी मंजिल से दूर रहतें हैं। लेकिन उन्हीं में से कुछ छात्र ऐसे भी होते हैं जो अपने पारिवारिक तंगी के कारण नौकरी करतें हुयें भी सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करते हैं।

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पारिवारिक दिक्कतों के कारण नौकरी की

जीएसएस प्रवीणचंद (GSS Praveenchand) आन्ध्रप्रदेश (AndhraPradesh) के निवासी हैं। प्रवीण के घर-परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण परिजनों को प्रवीण से नौकरी की आशा थी। प्रवीण ने भी परिवार की हालत को देखते हुयें नौकरी करने का फैसला किया लेकिन समस्याओं के आ जाने से उन्होंने कभी भी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। प्रवीणचंद आंध्रप्रदेश से 12वीं की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पटना (Patna) से आईआईटी (IIT) किया। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की उपाधि प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने एक अच्छी कंपनी में अच्छे पद पर नौकरी ज्वाइन कर लिया।

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नौकरी के साथ की यूपीएससी के परीक्षा की तैयारी का बनाया टाइम टेबल

प्रवीणचंद ने अपने सपने को साकार करने के लिये नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई करने का निर्णय लिया और इसके लिये उन्होंने समय सारिणी बनाया। उन्होंने निश्चय किया कि वे बिना किसी कोचिंग क्लास की सहायता से खुद ही UPSC की तैयारी करेंगे। प्रवीण ने अपने समय तालिका में सोने के लिये सिर्फ 5 से 6 घंटे का वक्त निर्धारित किया। वे सुबह 4 बजे से लेकर सुबह 9 बजे तक पढ़ाई करतें और जो नोट्स बनाते उसे अपने मोबाइल में सेव भी कर लेते थे। पढ़ाई करने के बाद वह दफ्तर जाते। रास्ते में जितना समय लगता उतने में प्रवीण अपने द्वारा बनाये गयें नोट्स पढ़ते थे। इसके साथ ही यदि ऑफ़िस में कम से फुर्सत मिलता तो वहां भी पढ़ाई करतें थे। अकेले होने के कारण उनको अपना सारा कम खुद ही करना पड़ता था, जैसे खाना बनाना। ऑफिस से आने के बाद इंसान नॉर्मली बहुत थक जाता है। लेकिन प्रवीण अपने सपने के लिये इस बात को इग्नोर करतें। वे ऑफ़िस से आने के बाद खाना बनाते और उसके बाद 11 बजे से 12 बजे तक फिर से अध्ययन करतें। 2 वर्ष तक प्रवीण का दिनचर्या ऐसे ही चलता रहा। हालांकि यूपीएससी का सिलेबस बड़ा होता है इसलिए तैयारी के लिए भी समय चाहिए, यह बात प्रवीण भली-भाँति जानतें थे।

यूपीएससी में पाईं सफलता, तीसरे ही प्रयास में UPSC में आया 64वां रैंक

नौकरी करने के साथ ही प्रवीण ने 2 बार यूपीएससी की परीक्षा में भाग लिया लेकिन दोनों ही बार उनको नाकामयाबी का सामना करना पड़ा। 2 बार असफल होने के बाद वे रुके नहीं। अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित किये। वे तीसरे बार परीक्षा में असफल होना नहीं चाहते थे। उन्होंने पूरी लगन के साथ सिलेबस तैयार किया और वर्ष 2018 में परीक्षा में भाग लिया। 2018 की परीक्षा में वे किसी भी प्रकार से कोई समझौता नहीं करना चाहतें थे। इसलिए उन्होंने पूरे दृढ़ विश्वास के साथ नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया और परीक्षा की बाकी तैयारियों पर कठिन मेहनत किया। आखिरकार सफलता मिल ही गईं। 2018 की परीक्षा में प्रवीण ने 64वां रैंक हासिल किया और सिद्ध किया कि मेहनत और लगन सच्ची हो तो सफलता कदम जरुर चूमती है।

The Logically प्रवीणचंद को उनकी मेहनत और सच्ची निष्ठा के लिये हृदय से नमन करता है और उनकी सफलता के लिये ढ़ेर सारी बधाईयां देता है।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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