Sunday, September 19, 2021

पिता के मौत के बाद आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा, 3 बहनों की जिम्मेदारी सम्भालने के साथ ही निकाले IIT और IAS के एग्जाम

हमारे देश में कुछ ऐसी परीक्षाएं होती हैं जिसको सबसे अधिक कठिन माना जाता है। उन परीक्षाओं में चयन के लिये छात्र अपना दिन-रात एक कर देते हैं। उनमें से ही एक परीक्षा यूपीएससी की होती है। UPSC सफल होने के लिए सभी प्रकार की सुख सुविधाओं को भूलकर घंटो पढ़ाई करतें हैं। तब कहीं जाकर यूपीएससी की परीक्षा में छात्र अपना स्थान सुनिश्चित कर पाते हैं।

हमारे देश में ऐसे भी प्रतिभावान हैं जिनके सर से पिता का साया छिन जाने के बाद.. घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए.. बग़ैर किसी सुख-सुविधा के.. यहां तक की खाने के लिये भरपेट भोजन नहीं होने के कारण बिस्किट खाकर रहने वाले.. इतने सारे कठिनाइयों को झेलने के बाद भी IAS बन सबके लियें एक उदाहरण बनते हैं।

हम बात कर रहें हैं IAS शशांक मिश्रा की। इन्होनें अपने जीवन में आर्थिक तंगी और मुश्किल हालातों का सामना करतें हुयें अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया और कामयाबी के शिखर को छू दिया।

शशांक मिश्रा (Shashank Mishra) उत्तरप्रदेश के मेरठ (Merath) के रहनेवाले हैं। शशांक जब 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे तब ही साथ-साथ आईआईटी (IIT) की भी तैयारी करने लगे थे। तब तक शशांक के जीवन में समय ने अपना करवट बदल लिया। शाशांक के पिता जी का देहांत हो गया। इनके पिताजी कृषि विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। किसी बच्चे के सर पर से पिता का साया छिन जाना क्या होता है, यह हम सब भली-भांति जानतें हैं। सर से पिता का साया छिन जाने के बाद शशांक छोटी-सी उम्र में ही जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गयें। पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उनके कंधो पर आ गईं। इसके साथ ही उनको आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। शशांक के पास अपने पढ़ाई की फीस देने के लिये भी पैसें नहीं थे। लेकिन शशांक मिश्रा 12वीं में अच्छे नंबरों से पास हुयें। अच्छे नम्बरों से पास होने के कारण उनके कोचिंग की फीस को कम कर दिया गया जिससे पैसों की तंगी से थोड़ी राहत मिली।

शशांक अपनी कड़ी मेहनत से आईआईटी (IIT) की परीक्षा में भी सफल हुयें और 137वां रैंक हासिल किए। उसके बाद शशांक ने इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग से B.Tech किया। B.Tech करने के बाद शशांक की अमेरिका के मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी लग गईं। शशांक को इस कंपनी में अच्छे पैकेज की सैलरी मिल रही थी लेकिन उन्होंने नौकरी करने से मना कर दिया।

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शशांक का हमेशा से सपना था कि वह एक IAS बने। इसलिये उन्होनें मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करने के साथ ही 2004 से यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा की तैयारी भी करने लगे। लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था। शशांक की आर्थिक परेशानी हटने के नाम नहीं ले रही थी। लेकिन शशांक ने ठान लिया था कि वह यूपीएससी की परीक्षा में सफल होकर रहेंगें। पैसों की कमी के कारण शशांक ने दिल्ली (Delhi) के एक कोचिंग सेंटर में पढ़ाने का काम शुरु किया। कोचिंग की आमदनी बहुत अधिक नहीं थी। यहां तक की उनको दिल्ली में किराया का रुम लेकर रहनें के लिये भी पैसें नहीं थे। शशांक प्रतिदिन मेरठ से दिल्ली का सफर तय करतें और ट्रेन में जो समय मिलता उसमें वह अपनी पढ़ाई करते। पैसों की कमी कुछ इस तरह थी कि रास्ते में भूख लगने पर भरपेट खाना खाने तक के लियें भी पैसे नहीं थे। तब वह बिस्किट खाकर अपना गुजार करतें थे। शशांक की जीवन में यह सब 2 साल तक ऐसे ही चलता रहा।

“इन्तज़ार का फल मीठा होता है।” शशांक ने UPSC की परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास कर लिया और उनका एलाइड सर्विस में चयन हो गया। लेकिन शशांक को तो किसी और मंजिल की चाह थी। एलाइड सर्विस में चयनित होने के बाद भी अपनी मंजिल को पाने के लिये वह मेहनत करतें रहें। आखिरकार शशांक मंजिल तक पहुंच ही गए। उनकी सच्ची लगन और कठिन मेहनत रंग लाई। दूसरे प्रयास में शशांक ने UPSC में 5वीं रैंक हासिल की। उनका चयन IAS (Indian Administrative Service) के लिये हो गया और सफलता की ऐसी मिसाल पेश कर दी जो सबके लिये एक प्रेरणा बन गया। वर्तमान में शशांक मध्यप्रदेश (MadhyaPradesh) उज्जैन जिले में कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।

शशांक मिश्रा की सच्ची निष्ठा और कड़ी मेहनत के लिए The Logically उन्हें हृदय से नमन करता है।