पिता चपरासी थे, अख़बार खरीदने तक के पैसे नही थे, कठिनाइयों के बीच पढकर बने IPS अधिकारी: प्रेरणा

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Ips Noorul hasan

जैसे कोयले के खाद्यान से हीरा निकलता है वैसे ही जीवन में कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करने के बाद मंजिल प्राप्त होती है। यदि किसी का जीवन कोयले के जैसे कठिन और संघर्षपूर्ण हो तो उसमें से हीरा अवश्य निकलेगा। इस बात को सभी जानतें हैं कि सफलता हासिल करने के लिए संघर्षमय रास्ते से गुजरना होता है। यदि हमें सफलता की चाह है तो चुनौतियों तथा कठिनाइयों की सीढ़ी पर चढ़ना ही पड़ेगा।

आज हम आपकों ऐसे ही शख्स के बारें में बताने जा रहें है जिसका बचपन बेहद ही गरीबी में व्यतीत हुआ। इनके पास रहने के लिये बस एक झुग्गी झोपड़ी थी। अपने जीवन में आनेवाली तमाम कठिनाईयों का साहस के साथ सामना करतें हुए इस शख्स ने UPSC में 625वीं रैंक हासिल की तथा IPS बनकर सभी के लिये बहुत ही प्रेरणादायक मिसाल कायम किया है।

 Noorul hasan

आइये जानतें हैं इस शख्स के बारें में जिनका जीवन कठिनाइयों और संघर्षों से व्यतीत हुआ

नुरूल हसन (Noorul Hasan) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के पीलीभीत जिले के रहनेवाले हैं। परंतु जब उनके पिता की पियोन की नौकरी लगी तो वे अपने परिवार के साथ बरेली आ गये। वहां जोवी नवादा स्लम क्षेत्र में उनका परिवार रहने लगा। नुरूल के पिता स्नातक तक की पढ़ाई किये है लेकिन उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी नहीं मिली। उसके बाद बरेली में ग्रुप डी के तहत जब उन्हें पियोन की नौकरी मिली तो उन्होनें इसे सही समझा। उस वक्त नुरूल के पिता की तनख्वाह मात्र 4 हजार रुपये थी। ऐसे मे घर का खर्च चलाना बहुत मुश्किल कार्य था। शुरु से ही घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

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नुरूल की 10वीं तक की पढ़ाई पीलीभीत से ही हुईं। नुरूल ने बताया कि उनके गांव में ऐसा स्कूल था, जिसके छत से बरसात के दिनों में पानी टपकता था। उसके बाद उनकी 12वीं कक्षा की पढ़ाई बरेली से हुईंं। नुरुल को न्यूज पेपर पढ़ने की आदत लग गईं। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी, इसलिए वे महीने के 250 रुपये भी नहीं दे सकते थे। इसलिए अखबार पढ़ने के लिये नुरूल पास के एक ढाबे पर जाते थे। उसके बाद नुरूल ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से B.Tech किया। नुरूल ने बताया कि उन्हें इंजीनियरिंग करने के लिये कोचिंग संस्थान की जरुरत थी, लेकिन उनके पास पैसे का अभाव था। पैसे के अभाव की वजह से नुरूल के पिता ने उनकी पढ़ाई के लिये अपनी एक एकड़ की जमीन को बेच दिया। नुरूल का चयन AMU (Aligarh Muslim University) में हो गया।

Ips Noorul hasan

AMU से B.Tech करने के दौरान ही नुरूल को सिविल सर्विसे के बारें में जानकारी हासिल हुईं। उन्होंने यूपीएससी के बारें में जानकारी प्राप्त किया और उसकी तैयारी में भी जुट गये। B.Tech की पढ़ाई पूरी करने के बाद गुरुग्राम की एक कम्पनी में उनकी नौकरी लग गईं। उसके बाद उन्होंने Bhabha Atomic Research Center (BARC) में ग्रेड 1 ऑफिसर के रूप में ज्वाईन किया। नौकरी के दौरान नुरूल ने सोचा था कि जितना तैयारी करने में आसानी हो उसी के अनुसार नौकरी करूंगा।

नुरूल ने 2012 में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा की तैयारी करना आरंभ कर दिया। वे जब इसकी तैयारी करने के लिए कोचिंग ज्वाईन करने गये तो उनसे मोटी रकम की मांग की गईं। उसके बाद उन्होंने निश्चय किया कि वे घर पर रहकर ही यूपीएससी की तैयारी करेंगे। नुरूल अपने पूरे जज्बे के साथ तैयारी में जुट गये। उनकी मेहनत रंग लाई। नुरूल ने 2015 के UPSC की परीक्षा में ऑल ओवर 625वीं रैंक हासिल किया। उनके सफलता से उनके माता-पिता और परिवार के सभी सदस्य उन पर गर्व की अनुभूति कर रहें हैं तथा वे बेहद खुश भी हैं। आपको बता दें कि नुरूल अपने परीक्षा की तैयारी के दौरान कभी किसी कोचिंग संस्थान नहीं गये। नुरूल हसन वर्तमान में महाराष्ट्र कैडर में 2015 बैच के IPS अधिकारी है।

नुरूल हसन ने यह साबित कर दिखाया है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आये उसका हिम्मत के साथ सामना करना चाहिए। The Logically नुरूल हसल को शत-शत नमन करता है।

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