Thursday, August 18, 2022

कैलाश मानसरोवर: एक अलौकिक जगह जहां भगवान शिव का वास है !

कैलाश मानसरोवर भगवान शिव के बारह ज्योतर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। Kailash Mansarovar हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। यहां साक्षात् भगवान शिव का वास है। हलांकि यहाँ जाना मुश्किलों भरा है फिर भी इस पावन तीर्थ पर जाने हेतु लोगों में हमेशा उत्सुकता भरी रहती है !

यहां भगवान शिव की आराधना की जाती है। कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित है। इसके पश्चिम में मानसरोवर झील तथा दक्षिण में रक्षातल झील है। कैलाश पर्वत को गणपर्वत और रजगगिरी भी कहा जाता है। इस पर्वत के शिखर की आकृति विशाल शिवलिंग की तरह है। यह हमेशा वर्फ से आच्छादित रहता है।

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कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा का काफी महत्व है। यह परिक्रमा तारचेन से आरंभ होकर वापस यही तारचेन में ही समाप्त होती है। इस यात्रा में दो मास का समय लगता है ! जो श्रद्धालु जीवन में एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के दर्शन करने आते और सच्चे मन से कैलाश की परिक्रमा पूरे करते हैं। उन्हें सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कैलाश में चारों दिशाओं में चार नदी ब्रह्मपुत्र, सिंधु, सतलुज और करनाली नदियों का उद्गम हुआ है। कैलाश में चारों दिशाओं में अलग- अलग जानवरों का मुख है। जिसमे नदियों का उद्गम होता है। पूरब में अश्वमुख, पश्चिम में हाथी मुख, उत्तर में सिंह मुख और दक्षिण में मोर मुख है। कैलाश मानसरोवर में हिंदू के अलावा बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी कैलाश को पवित्र स्थान मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहीं पर आदि शंकराचार्य ने अपना शरीर का त्याग किए थे।

कैलाश पर्वत पर जाने के दो रास्ते है। एक रास्ता उत्तराखंड से होकर जाता है और दूसरा रास्ता काठमांडू से होकर जाता है। उत्तराखंड के पिथौरागढ जिले के अस्कोट, धारचूला , खेत , गब्यार्गं , कालापानी , लिपूलेख , खिंड , तकलाकोट होकर जाने वाला मार्ग अपेक्षाकृत सुगम है ! इस मार्ग में कई धर्मशालाएँ हैं ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा में दिक्कत ना हो !

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