Thursday, January 20, 2022

रोज सुबह 4 बजे उठकर पैसे के अभाव में गैराज़ में कार धोते थे , 12वी की परीक्षा में टॉप किये : प्रेरणा

हाल ही में आए बारहवीं की रिजल्ट में अनेकों छात्रों ने अपने उत्कृष्ट प्रतिभा से सबको चौंकाने का काम किया है। बेहतर रिजल्ट लाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन सुविधाओं से वंचित किसी विद्यार्थी के लिए परीक्षा पास करने के साथ ही अच्छे अंक लाना एक टेढ़ी खीर जैसा है, जिसके लिए उसे अत्यधिक मेहनत करना पड़ता है !

लेकिन दिल्ली के परमेश्वरम ने यह साबित कर दिया की एक मेहनती विद्यार्थी सुविधाओं के अभाव में अपनी कड़ी मेहनत और लगन से केवल बेहतर अंक ही नहीं लाया जा सकता बल्कि अपने समकक्ष छात्रों को पुरज़ोर टक्कर भी दिया जा सकता है ।

दो कमरे के एक छोटे से घर में 9 परिवार के सदस्यों के साथ रहने वाले रामेश्वरम को सुविधा के नाम पर वह कुछ भी नहीं मिला है जो एक सामान्य छात्र को मिलना चाहिए, लेकिन सभी असुविधाओं के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत और लगन से रामेश्वरम ने 12वीं की परीक्षा में 91.7% अंक लाकर सबको चकित कर दिया।

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रामेश्वरम के लिए इतना कुछ कर पाना बिल्कुल भी सरल नहीं था ,उनके पास अपनी यूनिफॉर्म और किताब खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे । वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए हर सुबह 4:00 बजे उठ कर अपने घर से 2.5 किलोमीटर दूर पैदल एक गैराज मैं कार धोने चले जाते थे । कुछ घण्टे वहां काम कर रामेश्वरम 10-15 गाड़ियां धोते थे , सप्ताह में 6 दिन काम करने के बाद इन्हें महीने का ₹3000 मिलता था जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख पाये।

एनडीटीवी से बात करते समय रामेश्वरम ने बताया कि वह यह काम दसवीं क्लास से कर रहे हैं । वह कहते हैं – कभी-कभी तो इतनी तकलीफ होती थी कि ठंडी में गाड़ी धोते समय हाथ सुन्न पड़ जाते थे । ठंडी के मौसम में सुबह 5:00 बजे उठकर बर्फ जैसे पानी को छूने में बहुत तकलीफ होती थी, लेकिन वह लेट भी नहीं कर सकते , क्योंकि ग्राहक उन पर झल्लाने और चिल्लाने लगते थे । फिर भी उन्हें या काम करना पड़ा । महीने के आखिरी में मिले ₹3000 से वह अपने घर की मदद करते हैं और साथ ही खुद की पढ़ाई भी करते हैं।

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रामेश्वरम के पिता का उम्र 62वर्ष है ,जो दिल के मरीज़ हैं । बीमारी होने के कारण वह कोई स्थाई नौकरी नहीं कर पाते हैं इसलिए रामेश्वरम नहीं चाहते कि उनके पढ़ाई का भार उनके परिवार के ऊपर आए । कुछ दिनों पहले रामेश्वरम के पिता का ऑपरेशन हुआ जिसके दौरान वह दिन रात उनकी सेवा के लिए हॉस्पिटल में ही रहते थे और वहीं से अपना पढाई करते रहते थे।

रामेश्वरम बताते हैं कि आगे चलकर वह शिक्षक बनना चाहते हैं ताकि गरीब तबके के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे पाएं।
Logically रामेश्वरम के जज्बे और मेहनत को सलाम करता है और साथ ही यह शुभकामना देता है की रामेश्वरम अपने लक्ष्य प्राप्ति में सफल होकर अपने सपने को साकार कर पाएं।