Sunday, October 24, 2021

बंजर पहाड़ी पर लगाये 4000 पेड़, युवाओं की इस टोली ने किया असम्भव को सम्भव: पर्यावरण

देश में बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ प्राकृतिक स्त्रोतों का हनन हो रहा हैं। उदाहरण के लिए पेड़ों की संख्या घट रही है, जल का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल होने के साथ-साथ दुरुपयोग भी हो रहा हैं। अगर पृथ्वी से पेड़ों की संख्या पूरी तरह समाप्त हो गयी तो धरती पर जीवन का अस्तित्व भी समाप्ति के कगार पर पहुँच जायेगा। अगर जीवन के अस्तीत्व को बचाना है तो पेड़ों का सरंक्षण अनिवार्य है। इसके बावजूद भी किसी का ध्यान इस बात पर नहीं जाता। अगर धरती पर वृक्ष अधिक होंगे तो इसके फायदे सभी जीव को होंगे जैसे- पशु-पक्षी, मनुष्य आदि। पेड़-पौधों से हमारा पर्यावरण स्वच्छ रहेगा, हम सब स्वच्छ हवा में सांस लेंगे तो इससे बीमारियाँ भी कम होगी। पेड़ों के रहने से हमारे आस-पास का वातावरण स्वच्छ रहेगा और सांस लेने के लिए हमें ताज़ी हवा मिलेगी। इसके साथ ही वातावरण खुबसूरत भी दिखाई देगा और पर्यावरण हरा भरा रहेगा। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर कुछ युवकों ने मिलकर सूखी और बंजर पहाड़ी पर भी पेड़ लगा कर उसको हरा भरा कर दिया हैं। आइए जानते है एक बंजर जमीन पर हरियाली छाने की कहानी।

यह कहानी मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के बुरहानपुर (Burahaanpur) में स्थित लालबाग की हैं। लालबाग में एक पहाड़ी है जिसे सतपुरा की पहाड़ी कहते हैं। कीर्ति कुमार जैन (Kirti Kumar Jain) बुरहानपुर (Burahaanpur) के युवा समूह के सदस्य हैं। कीर्ति कुमार की एक फोटोकॉपी की दुकान है। सतुपुरा पहाड़ी के बारें में उन्होनें बताया कि एक समय था जब मानसून आने पर इस पहाड़ी पर हरियाली ही हरियाली थी। मानसून के मौसम में यहां पेड़ पौधों में बहार आ जाती थी लेकिन धीरे-धीरे मनुष्यों ने पेड़ों की कटाई इस कदर की कि आज वहां की जमीन बंजर हो गयी है। धीरे-धीरे वहां पानी का भी समापन हो गया।

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Source-ThebetterIndia

कुमार जैन (Kumar Jain) ने बताया कि सतपुरा (Satapura) पहाड़ी पर फिर से हरियाली लाने के लिए, दुबारा से इस पहाड़ी को हरा भरा रखने के लिए उन्होनें अपने मित्रों के साथ इस पर विचार किया और 20 से 25 लोगों का एक ग्रुप बनाया। पहाड़ी पर जीवन दुबारा से शुरु करने के लिए उनहोंने निश्चय किया कि वह वहां 200 पेड़ लगायेंगे और बारिश के पानी को बचाने के लिए इन्तजाम करेंगे। लेकिन बंजर और सुखी जमीन पर जहां पानी की एक बूंद तक न हो वहां पौधा लगाना सरल काम नहीं था। ऐसे में पौधा लगाने के लिए पहाड़ी पर पानी लेकर जाना एक बहुत बड़ी समस्या थी। पहाड़ी की ऊंचाई करीब 150 फीट है। पर कहते हैं न, जहां चाह होती है वहां राह मिल ही जाती है। उन्होंने उस पहाड़ी जाने-आने के लिए जेसीबी (JCB) मशीन की सहायता से एक रास्ते का निर्माण किया जिससे पहाड़ी पर आने-जाने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

पहाड़ी पर रास्ते के निर्माण होने के बाद उस पहाड़ी के 30 एकड़ जमीन पर बारिश के पानी को जमा करने के लिए उन्होंने 10 से 12 जगहों पर तालाब बनाया जिससे बारिश का पानी बाहर न जा कर तालाब में ही रहें। सभी तालाब को एक-दूसरें से आपस में जोड़ दिया लेकिन तालाब में बारिश का पानी तब इकट्ठा होगा जब बारिश होगी। कीर्ति और समूह के लोगों ने जब पेड़ लगाना आरंभ किया उस वक्त तक वहां बारिश नहीं हुई। अगर पौधों में पानी नहीं डाला जाये तो वह सूख जाते है। ऐसी परिस्थिति में पहाड़ी पर नीचे से पानी लेकर जाना एक समस्या बन गया था लेकिन सच्चे मन से कोशिश करने पर सफलता ज़रुर मिलती है और रास्ते भी खुद-ब-खुद निकल आते हैं। उन्होंने पानी जमा करने के लिए तिरपाल का उपयोग कर एक बनावटी तालाब का निर्माण किया और उसमे मोटर पम्प की सहायता से बाल्टियों में पानी भर कर उस तालाब तक पहुँचाया और पानी को इकट्ठा किया। ऐसा करने से उन्हें पौधें लगाने में बहुत आसानी हूई और उन सभी की सच्चे मन से की गयी मेहनत ने अपना रंग दिखाया और उस पहाड़ी को फिर से वृक्षों से हरा-भरा कर दिया।

सिर्फ पेड़ लगा दिये इतना से ही नहीं होता उसे हर-भरा रखने के लिए पौधों की देखभाल भी बहुत ज़रूरी है ताकी पहाड़ी हमेशा हरियाली से परिपूर्ण रहें। इसके लिए कीर्ति और उनके साथी रोज पेड़ों की देखभाल करते हैं और उनमे समय समय से पानी भी डालते हैं। कीर्ति के द्वारा बनाये गये ग्रुप में सदस्य के रूप मे अश्विनी महाजन (Ashwini Mahajan), गोविंद यादव (Govind Yaadaw), मेघराज महाजन (Meghraaj Mahajan), विष्णु सोनकर (Vishnu sonkar), दिनेश मौर्य (Dinesh Maurya), अशोक दुबे (Ashok Dube), अखिलेश तिवारी (Akhilesh Tiwari), मयूर जोशी (Mayur Joshi), अनिकेत सन्यास (Aniket Sanyaas), पांडु गंगाराम (Paandu Gangaram) जैसे और भी कई नाम शामिल हैं जिन्होनें पहाड़ी को हरियाली से भरने के लिए कड़ी मेहनत की।

हरियाली के लिए नवयुवकों ने खुद का पैसा इकट्ठा किया और इन युवाओं की थोड़ी मदद वन विभाग ने भी किया। सतपुरा पहाड़ी का क्षेत्र वन-विभाग के अधीन आता है। इस पहाड़ी पर अब शहरी लोग भी अपने जन्मदिन, सालगिरह पर या और भी कई त्योहारों पर अपने परिजनों के साथ आते हैं और पौधा लगाते हैं।

स्वछ्ता को ध्यान में रखकर पहाड़ी पर हरियाली लाने के प्रयास करने वाले कीर्ति कुमार और उनके साथियों को The Logically सलाम करता हैं।