Wednesday, December 2, 2020

क्लब 60: इस उम्र में भी पूरे जोश के साथ पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर कर रहे हैं काम, प्रधानमंत्री कर चुके हैं तारीफ

वक़्त सबसे बड़ा गुरु है क्योकि जो वक़्त सिखाता है वो दुनिया में कोई नहीं सिखा सकता। हमारे जीवन मे अक्सर ऐसी घटना घटती है जो हमारे जीवन को बदल कर रख देती है पर हम ये क्यूँ भूल जाते है की रात के घने अंधकार के बाद एक रौशनी भरी सुबह है हमे समय से सबक लेकर सीखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। 60 की उम्र के बाद अधिकतर लोग आराम करते हैं, रिटायरमेंट लेकर अपने हिसाब से जीवन जीना पसंद करते है उम्र के इस पड़ाव में वो अपने हिसाब से जीते है और दोस्तो के साथ समय व्यतीत करते है लेकिन क्लब 60 के कर्मयोगी सर्वहित के काम करते हैं। वह अपने काम को पूरी मेहनत, ईमानदारी,अपने ज्ञान,अनुभव और सतप्रयासों से अपने आसपास सुखद बदलाव लाकर दूसरों को प्रेरित करते हैं वह अपने कामों में इतने अव्वल है कि युवाओं को भी पीछे छोड़ रहे है।

यूँ हुई शुरुआत…

मेरठ,उ.प्र. के महेश रस्तोगी बैंक से रिटायर होकर ऊब,उदासी व अवसाद में चले गए थे। हिंदी फिल्म क्लब-60 देख कर वह अपना समय सकारात्मक कार्यों में लगाने को प्रेरित हुए तथा 5 वर्ष पूर्व उन्होंने आसपास के वरिष्ठ नागरिकों का संगठन ‘क्लब-60’ बनाया था।इसका उद्देश्य अपने सभी सदस्यों को व्यस्त व स्वस्थ रखना है। इस क्लब में 60 से 78 साल तक के 15 सदस्य हैं जिनके नाम है श्री रमेश रस्तोगी,श्री हरि मोहन मित्तल,श्री पी के त्यागी,श्री पी डी स्वामी, श्री अरुण मलिक, श्री आर के गुप्ता, श्री महेश रस्तोगी, श्री जे के आर्या,श्री सुनील अग्रवाल, श्री पी के रस्तोगी,श्री हरि विश्नोई, श्री सुधीर शर्मा, श्री दर्शन विरमानी, एस के सिंह, श्री वी के कंसल और श्री वी पी शर्मा। यह लोग अपने कार्यों से युवाओं को भी मात देते हैं। ये लोग योग, व्यायाम, सैर, बैठक व लाफ्टर योगा आदि करते हैं। साथ ही वृक्षारोपण,कचरा प्रबंधन,कम्पोस्टिंग,जल संरक्षण, बेकार चीजों को सुधार संवार कर उनका पुनरोपयोग, पॉलीथिन मुक्ति,पक्षी आवास, उनका दाना पानी जैसे 15 से अधिक काम करते हैं।इन्होंने 200 घरों को कपड़े के बैग्स दिए।लॉक डाउन में 31 हजार रुपए प्रधानमंत्री कोष में भेजे,बेसहारा लोगों को भोजन, लावारिस गायों को चारा इत्यादि। जयहिंद सोसायटी की मदद से 500 परिवारों को राशन, 800 लोगों को मास्क व 600 निर्धन महिलाओं को सेनेटरी पैड्स बांटे तथा इहा ग्रीन क्लब के साथ 5 विषयों पर राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन प्रतियोगिताए की। इस क्लब के सदस्य समाज हित में जुटे रहते हैं।

प्रधानमंत्री जी मन की बात में कर चुके है ज़िक्र

प्रधानमंत्री जी के 30 जून, 2019 की ‛मन की बात’ में इस क्लब के प्रेरक कार्य दिखाए गए थे। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 में इन्हें वाटर हीरो का अवार्ड व 10 हजार रु देकर इनको प्रोत्साहित किया जिसका प्रयोग क्लब 60 के सदस्यों द्वारा इस राशि से 15 गरीब बच्चों को स्कूल ड्रेस दी गईं। क्लब 60 वाकई एक मिसाल है उन सब के लिए जो समय और उम्र का बहाना करते है

कचरा निपटान के लिए किया नया अविष्कार

महेश रस्तोगी वर्षों तक अपनी ‛जयहिंद आवास सोसायटी’ के सचिव रहे। वह अपनी कालोनी व पार्क के पेड़ पौधों की पत्तियों, कटिंग्स व घास आदि न उठने से परेशान थे।उन्होंने नेशनल सेंटर फॉर आर्गेनिक फार्मिंग गाजियाबाद के वेस्ट डी कम्पोजर द्वारा गार्डन वेस्ट से वैदिक कम्पोस्ट बनाकर कचरा निपटान का नायाब तरीका ढूंढ निकाला। वर्मी कम्पोस्ट बनाने में हजारों रुपये व पुराने तरीके से कम्पोस्ट बनाने में दो साल लगते हैं, जबकि इस नई तकनीक से मात्र 100 रुपए से भी कम खर्च में 140 दिनों में ही कम्पोस्ट बन जाती है,जिससे ऑर्गेनिक फल,फूल व सब्जियां उगाते हैं। नगर निगम,मेरठ विकास प्राधिकरण के पार्कों व कई स्कूल कालेजों ने उनकी इस विधि को अपनाया है।

मेरठ की कमिश्नर ने बढ़ाया हौसला

मेरठ की कमिश्नर ने प्रोत्साहन स्वरूप 3 लाख रु मूल्य के 200 होम कम्पोस्टर यूनिट्स नगर निगम की ओर से क्लब 60 को उपलब्ध कराई, जिन्हें किचन के कचरे से कम्पोस्ट बनाने के लिए कॉलोनी के घरों में लगाया गया है। इससे शास्त्री नगर, एच ब्लाक की जयहिन्द सोसायटी, मेरठ उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी कम्पोस्टिकृत सोसायटी बन गई है, जहां घर-घर में रसोई से बचे गीले कचरे से कम्पोस्ट बनती है। क्लब के सदस्य हरि विश्नोई ने कचरा प्रबंधन पर टैगोर पार्क में एक लघु प्रदर्शनी लगा रखी है,जिसमे दिखाया गया है कि कोई भी कूड़ा बेकार नहीं होता तथा थोड़े से प्रयास से उसे कंचन बनाया जा सकता है।

जीरो वेस्ट मॉडल का किया निर्माण

स्वच्छ सर्वे 2018 की वार्ड प्रतियोगिता में इनका वार्ड 26 पूरे जिले में प्रथम स्थान पर रहा। अपने पार्क व कॉलोनी में जीरो वेस्ट मॉडल बनाने के लिए जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, मंडल कमिश्नर, स्वास्थ्य व नगर विकास मंत्री आदि ने इन्हें सम्मानित किया है। टैगोर पार्क में जल बचत हेतु बिना सरकारी सहायता के स्प्रिंकलर, ड्रिप इरीगेशन,वाटर स्टोरेज टैंक व कॉलोनी में 4 रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट लगे हैं। ‛क्लब-60’ के सदस्य रोज़ सुबह-शाम 7 से 8 बजे तक इच्छुकजनो को वेस्ट डीकम्पोजर घोल,कम्पोस्ट बनाने की ट्रेंनिग,सरकारी स्कीम्स की जानकारी,रोपने हेतु निःशुल्क पौधे देते हैं।

पुरानी बेकार चीज़ों को बनाया आकर्षक

‛क्लब-60’ के सदस्य सुधीर शर्मा ने वेस्ट टू आर्ट के तहत बेकार टायर, पाइप,एसीपी शीट व किवाड़ जैसी पुरानी चीजों को संवार कर सुंदर ट्री गार्ड,पुष्प वाटिका,जेबरे, हट व फ्लावर स्टैंड आदि अनेक आकर्षक चीजें बना कर टैगोर पार्क में लगाई हैं।
अब औषधीय पौधे, सोलर लाइट ओपन जिम लगाया जाएगा।

विशेषताएं

इस क्लब में कोई पद व सदस्यता शुल्क नहीं है। शून्य आधारित बजट,श्रम दान को वरीयता व न्यूनतम व्यय पर जोर दिया जाता है।यदि सभी लोग ऐसा सोचे व करने लगें तो हमारे देश व समाज के कायाकल्प की गति तेज हो सकती है।

बुजुर्गों को दे रहे है हौसला

सोशल मीडिया पर ‛क्लब- 60’ मेरठ से प्रेरित होकर नोगांव, बीड़ और नोएडा आदि में भी वरिष्ठ नागरिकों द्वारा क्लब 60 बने हैं। जिसमे सभी लोग कई तरह की गतिविधियां कर रहे है अपने आस पास खुशहाली व हरियाली का माहौल बनाए हुए है। वह अब पहले से अधिक खुश है और हम सब कर सकते है ये हौसला भी उनमें आया है।

क्लब 60 के सदस्य श्री हरि विश्नोई जी बताते है हमें यह काम करना अच्छा लगता है इससे हम व्यस्त भी रहते है और स्वस्थ भी। हमे खुशी होती है की इस उम्र में भी हम देश की तरक़्क़ी में अपना योगदान दे रहे है।
क्लब 60 का आदर्श वाक्य है :-
उम्र का बढ़ना तो रस्मे जहां है,
काम करते रहें तो बुढापा कहां है..?

पूरे देश को प्रधानमंत्री जी मन की बात में क्लब 60 के द्वारा किये गए कार्यो तथा उन्होंने मानवता की जो मिसाल पेश की है उसको संबोधित कर चुके है। क्लब 60 के बुजुर्ग हम सभी व्यक्तियों के लिए प्रेरणा है। हम क्लब 60 द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते है।

Anu Gangwal
दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए और ट्रांसलेशन कर चुकी है अनु साहित्य में विशेष रुचि रखती हैं। इनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं तथा वेबसाइटों पर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में फ्रीलांसर राइटर, एडिटर, प्रूफरीडर तथा ट्रांसलेटर का कार्य कर रही हैं।

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