Friday, January 22, 2021

राजस्थान का यह युवा इंजीनियरिंग छोड़ शुरू किया फूलों की खेती, पहली बार मे कमाया ढाई लाख रुपये

आजकल जैसे-जैसे युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं वैसे ही उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को खेती-बाड़ी का नवाचार अपनी ओर काफी आकर्षित कर रहा है। कृषि एक ऐसा क्षेत्र बन कर उभरा है जो उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों को भी अपनी ओर लुभा रहा है। कृषि की तरफ बढ़ते रुझान से फायदा भी है। खेती-बाड़ी लोगों को आत्मनिर्भर बनाता है। खेती से मुनाफे भी हो रहें हैं। अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कर कई सारे युवा कृषि को गले लगा रहें है और काफी मुनाफा कमा रहें हैं। लोग अलग-अलग तरीके से अलग-अलग फसलों की खेती करते हैं। उदाहरण के लिये सब्जियों की खेती, अनाजों की खेती, फूलों की खेती। आजकल फूलो की खेती यानि फ्लोरिकल्चर में भी लोग काफी दिलचस्पी दिखा रहें हैं।

आज हम आपको एक ऐसे युवा के बारें में बता रहें है जिन्होंने अपनी एमएससी कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर कृषि कार्य में जुड़ गये हैं और ढाई बीघे जमीन पर फूलों की खेती कर रहें हैं। फूलों की खेती के साथ-साथ वह ताइवानी पपीते की खेती भी करने की चाह रखते हैं।

मोहित चौधरी (Mohit Chaudhary) मनियां, धौलपुर (राजस्थान) के गांव जगरियापुर के रहने वाले हैं। अपनी कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की जॉब छोड़ कर खेती में भविष्य बना रहें हैं। मोहित एक साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट (Cyber Security Expert) हैं। यह ढाई बीघे खेत में फूलों की खेती कर रहें हैं। मोहित विदेशी फूलों की खेती कर रहें है जिसकी डिमांड हर जगह तेजी से बढ़ रही है। मोहित के खेत में उगाये गये फ़्रैंच एन्ड अफ्रीकन गेन्दा के फूलों की डिमांड फूल की मंडियों और उसके कारोबारियों में बढ गईं है, जिससे उनका नवाचार अच्छी कमाई के साथ तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

मोहित चौधरी (Mohit Chaudhary) का मानना है कि पारंपरिक खेती के सहारे घर-परिवार का भरण-पोषण करने युक्त आमदनी नहीं हो पाती है। मोहित के पिता जी भी खेती-बाड़ी करते हैं। मोहित का मानना है कि यदि वो इंजिनियर की जॉब करते तो पिता की खेती-बाड़ी को संभालने वाला कोई नहीं रहता, जिसके कारण जमीन बंजर हो जाती। जमीन बंजर पर खेती करना बहुत मुश्किल है। इन्हीं सब बातों के बारे में सोच कर मोहित ने नवाचार का संकल्प लिया और फूलों की खेती करने का निश्चय किया। उसके बाद उन्होंने फूलों की खेती करने लगे। मोहित चौधरी अपने कृषि कार्य से लगभग 50 लाख रूपये सालाना आमदनी कमाने की चाहत रखते हैं।

मोहित चौधरी के खेत की फुलो की डिमांड ग्वालियर दिल्ली के ग़ाज़ीपुर की मंडियों और आगरा के फूलों की मंडियों में बहुत ही जोर-शोर से है। मोहित ने फ़्रैंच गेन्दा के फूलों की खेती करने के लिये बेंगलुरु से पौधें मंगवाए थे। हालांकि वर्तमान में मोहित चौधरी ताइवानी पपीते की फसल उगाने की कोशिश में लगे हैं। इसके साथ ही वह एक ही खेत में इंटरक्रॉप खेती कर 6 प्रकार के फसलों को उगाना चाहते हैं।


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मोहित ने बताया कि विदेशी ताइवानी पपीता एक ऐसी किस्म है जिसके एक पेड़ से 100kg तक पपीते का उत्पादन होता है। ताइवानी पपीता का स्वाद बहुत ही रसीला और मीठा होता है तथा यह बहुत कम समय में ही तैयार भी हो जाता है। पपीता को रोपने के 10 से 11 महीनों में ही उत्पादन मंडियों तक पहुंच जाता है। मोहित ताईवानी पपीते की खेती जैविक तरीके से कर उत्पादन करने की चाह रखते हैं। इसके साथ ही मोहित इस पपीते की खेती से साल में 40 लाख रुपये की आमदनी करने का भी चाह रखते हैं।

मोहित चौधरी के पिता जी रमेशचन्द्र सरपंच का कहना है कि, लाल ईडेन ओरेंज फ़्रैंच वैरायटी तथा यलो प्राइड प्लस की अफ्रीकन किस्म के फूलों की कीमत गवालियर में सौ से सवा सौ रुपये किलों के भाव से तथा दिल्ली में डेढ़ सौ रुपये किलो के भाव से बिक्री हो रही है।

बीते दिवाली के वक्त मोहित को ढाई बीघे में हुए गेन्दा के फूलों के उत्पादन से ढाई लाख रूपये की आमदनी हुई थी। पहली ही बार में अच्छी किस्म वाले गेन्दा फूलों की उत्पादन को देख कर उस क्षेत्र के किसान और हॉर्टीकल्चर अधिकारी भी अचंभित हो गये थे।

The Logically मोहित चौधरी को प्रकृति से जुड़ने और उनके साथ बने रहने के लिये धन्यवाद देता है। साथ ही उनके द्वारा किये गये फूलों की खेती के क्षेत्र में प्रयास को नमन करता है।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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