Tuesday, September 28, 2021

परिवार वालों के शादी के दबाव के कारण घर छोड़कर भाग गई, 7 साल बाद PCS अधिकारी बन वापस लौटी: महिला शक्ति

जिंदगी में बाधाएं आती रहेंगी। उससे विचलित हुए बिना अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु प्रयास निरन्तर और बेहतर किए जाते हैं तो सफलता निश्चित हीं कदम चूमती है। किसी भी इंसान के लिए उसकी आजादी उसके लिए प्रमुख हथियार होता है जिसके बल पर वह खुद के लक्ष्यों को निर्धारित करता है और उसे पाने हेतु प्रयास करता है और फिर सफलता प्राप्त करता है। लेकिन इन सबसे विपरीत अगर सामाजिक बंधनों का हवाला देकर यदि आजादी छीन ली जाए और आपको अपने लक्ष्यों को पाने से रोक दिया जाए तो कल्पना कीजिए कि जिंदगी कितनी नीरस हो जाती है। आज बात इसी विषम परिस्थितियों को तोड़कर, बंधनों से खुद को मुक्त कर सफलता की इबारत लिखने वाली एक महिला की। आईए जानते हैं कि उन्होंने किस तरह बंधनों की जंजीरों को छोड़ और सफलता पाईं…

अपने लक्ष्य को पाने हेतु त्याग दिया घर

मेरठ की रहने वाली संजू रानी वर्मा जो 7 वर्षों के कठिन परिश्रम के बाद एक अफसर बनी। संजू एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती है जहाँ लड़कियों की शादी 12वीं के बाद हीं कर दी जाती है नौकरी करना तो दूर की बात है। संजू पर भी घरवालों ने शादी का दवाब बनाना शुरू किया तो उन्होंने शादी से बचने के लिए अपना घर छोड़ दिया और सात वर्षों बाद एक पी. सी. एस अफसर बन घरवालों का नाम रौशन किया। वह जल्दी ही कमर्शल टैक्स ऑफिसर के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लेगी। मेरठ के एक छोटे से गांव में पैदा हुई संजू की अफसर बनने तक का सफर आसान नहीं था। संजू जहाँ से आती हैं वहाँ लड़कियों को अधिक नही पढ़ाया जाता बल्कि 12वीं पास होते ही उनकी शादी कर दी जाती है पर संजू जो कि अपने सपनों के लिए हर पल जीती थी उसे शादी करना गवारा नहीं था। उनको भीड़ से अलग करना था उन्हें सिविल सर्वेन्ट बनना था बस अपने सपनों की खातिर वह छोड़ आई अपना घर और उन्हें अपने सपनों की खातिर हर दिन संघर्ष करना पड़ता था।

PCS officer Sanju Rani Varma

पढ़ाई करने हेतु कभी ट्यूशन पढ़ाए तो कभी नौकरी की

संजू सपनों की खातिर घर तो छोड़ आई थी पर उनका खर्चा चलाना बहुत मुश्किल काम था तो इसके लिए संजू ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाए, प्राइवेट नौकरी की और अपने सपनों के लिए हर दिन मेहनत की और संजू की मेहनत आखिर रंग लाई। संजू कहती है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने प्रयासों के बाद कामयाब हुए बल्कि फर्क इससे पड़ता है कि आपको कामयाबी मिली है या नहीं।

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बेहद हीं सकारात्मक रहकर पाईं अपनी मंजिल

संजू ने 2004 में अपना ग्रेजुएशन किया वह यूपीएससी की परीक्षा देना चाहती थी वह यह तो जानती थी कि यूपीएससी के लिए ग्रेजुएशन जरूरी है परंतु उसकी पढ़ाई रणनीति सभी के लिए काफी मेहनत की जरूरत लगती। अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। फिर संजू ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन का एंट्रेंस टेस्ट दिया असल मे संजू दिल्ली में पढ़ाई का कैसा माहौल है, कैसे पढ़ाई की जाती है, कितना कॉम्पिटिशन है यह सब देखने आई थी। यह सब देखकर संजू जान गई थी कि यूपीएससी की पढ़ाई के लिए धैर्य आवश्यक है। संजू बताती है दिल्ली में सब अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं यहाँ दिन में सोते हैं और सारी-सारी रात उठ कर पढ़ाई करते हैं। संजू बताती हैं कि मेहनत कभी खराब नहीं जाती। संजू जल्दी ही कमर्शल टैक्स ऑफिसर के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लेगी। वह भविष्य में यूपीएससी की परीक्षा पास कर वह आईएएस यानी कलेक्टर बनना चाहती हैं।

अंत मे बस इतना ही कहना चाहूंगी कुछ अलग और अच्छा करने का जुनून हो तो पूरी कायनात आपको आपके सपने पूरे करने में मदद करती है बस जरूरत है तो सिर्फ खुद पर और काम के प्रति ईमानदार होना। आज संजू अनेकों लड़कियों की प्रेरणा बन गई हैं। हम संजू के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

सामाजिक बंधनों से जूझकर खुद को उनसे अलग कर अपने लक्ष्यों के प्रति अडिग रहकर जिस तरह संजू रानी वर्मा ने सफलता प्राप्त किया है वह नि:संदेह वैसे कई लोगों के लिए प्रेरणा है जो सामाजिक बंधनों में अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। The Logically संजू रानी वर्मा जी के साहस, काबिलियत और संघर्षों को सलाम करता है।