Sunday, October 25, 2020

दलित परिवार में जन्म लेने से लोगों ने खूब ताना दिया, 56 वर्ष की उम्र में बन चुके हैं 60 करोड़ की कम्पनी के मालिक

यह बात बहुत हद तक सत्य है कि अगर कोई इंसान गरीबी की मार झेल रहा है तो बहुत कम व्यक्ति हैं जो इससे मतलब रखतें हैं। अगर कोई इनकी जगह दौलतमंद हो तो लोग उन्हें देखने और उनकी मदद के साथ हाल-चाल भी पूछतें हैं। आज की कहानी एक ऐसे शख्स की है जो गरीबी के हद को पर कर 5 हज़ार से कमाई कर 60 करोड़ का व्यपार स्थापित कियें हैं।

राजा नायक की पहचान

56 वर्षीय राजा नायक (Raja Nayak) की ज़िंदगी प्रेरणास्रोत और संघर्ष से भरी हुई है। दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री कर्नाटक के अध्यक्ष नायक कहते हैं, “जैसे-जैसे आप समाज के ऊंचे स्तर पर जाते हैं कोई भी आपकी जाति को नहीं देखता है।” राजा नायक कई व्यवसाय चलाते हैं जिसकी सालाना टर्नओवर 60 करोड़ रुपये है। लेकिन इतना आसान नहीं था ये सब पाना। उनका बचपन कुछ इस तरह कटा हैं कि खाली पेट कई रात सोना पड़ता था।

दलित परिवार में हुआ जन्म

नायक का जन्म दलित परिवार में हुआ जिस कारण इनके पालन-पोषण में बहुत दिक्कतें आईं। 5 बच्चों का लालन-पालन बड़ी ही मुश्किल से हो रहा था। नायक परिवार में सबसे बड़े बच्चे थे। इनके पिता के पास कोई नियमित काम नहीं था। इसलिए उनके बचपन की ज्यादातर यादें खाली पेट बिस्तर पर सोने, नंगे पैर चलने, और समय पर फीस न देने के कारण स्कूल से बाहर निकाल दिए जाने जैसी है।


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शुरू कियें व्यापार

नायक पैसे कमाना चाहतें थे। लेकिन इन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि अपने जीवन में इस मुकाम तक पहुंचेंगे।  यह महसूस करते हुए कि जीवित रहने का एकमात्र तरीका जल्दी काम करना शुरू करना है। नायक ने अपने किशोरावस्था के वर्षों को बिताया। फिर अपने वस्त्र उद्योग के लिए कोयंबटूर के पास तिरुप्पुर से खरीदे गए निर्यात-अधिशेष शर्ट बेंचने लगें। यह शर्ट्स उनके द्वारा खरीदे गए दाम से दुगुने दाम पर बेचे गयें। दिन के केवल एक घंटे में दोपहर 2 से 3 बजे के बीच इन्होंने अपना पूरा स्टॉक बेचकर 5,000 का लाभ कमाया। नायक ने बताया कि “मेरे पास एक लॉजिस्टिक कंपनी थी और यहीं पर मुझे बहुत अधिक व्यापार मिला।” क्योंकि उदारीकरण के बाद बहुत सारे निर्यात और आयात होने लगे, हर जगह व्यापारिक उद्घाटन हुए और बहुत सारी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सामने आईं। इसलिए इसमें किसी तरह की योग्यता या जातिगत भेदभाव की आवश्यकता नहीं थी। इनके एक और व्यापार जिसमें पेयजल को पैक किया जाता है। पर्पल हेज़ नाम के ब्रांड के साथ इनका स्पा और ब्यूटी सैलून भी है।

NGO है जिसके माध्यम से दलित बच्चों को पढ़ाया जाता है

नायक का एक NGO है, जिसका नाम “कलानिकेतन एजुकेशनल सोसाइटी” है। इसके जरिए गरीब बच्चों के लिए स्कूल कॉलेज चलतें हैं। अगर कोई बच्चा पढ़ने में तेज है तो उसे यहां रखकर 2 वर्ष की निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। इनके द्वारा किये गए पुण्य कार्यों के लिए आज यह “कर्नाटक के कॉमर्स और इंडस्ट्रीज के दलित इंडियन चैंबर के अध्यक्ष है।

गरीबी को मात देकर अपनी सफलता का परचम लहराने के लिए The Logically राजा नायक (Raja Nayak) को सलाम करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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