Saturday, June 25, 2022

जरूरतमन्दों को मुफ्त भोजन कराने के लिए शुरू किए Rice ATM, अभी तक अपने जेब से खर्च कर चुके हैं 5 लाख रुपये

हम सब ATM के बारे में बख़ूबी जानते हैं। अपने रोजमर्रा की ज़िंदगी में उपयोग भी ख़ूब करते है। लेकिन क्या आप किसी ऐसे एटीएम के बारे में जानते है जिससे गरीबों का पेट भरता है… शायद नहीं। आज हम आपको एक ऐसे एटीएम के बारे में बताएंगे जो गरीबों के पेट भरने का काम करता है

हमारे देश में यू हीं अशिक्षा, बेरोज़गारी, भुखमरी… की समस्याएं बहुत सारी है। कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरे देश में लोगों के पास रोज़गार के लाले पड़े हुए है। कई लोग दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं। ऐसी गंभीर समस्याओं को देखते हुए हमारे देश में अलग-अलग शहरों से अनेकों समाजसेवी लोगों की मदद के लिए सड़कों पर उतरे हैं। जिनमें से एक है हैदराबाद के रहने वाले रामू दोसपाटी। रामू MBA ग्रेजुएट हैं और एक सॉफ्टवेयर फार्म में HR मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। रामू दोसपाटी (Ramu Dosapati) गरीब और बेसहारा लोगों की मदद के लिए दिन-रात एक किए है।

ऐसा ATM जो लोगों को खाना देता है

रामू दोसपाटी (Ramu Dosapati) “राइस एटीएम” (Rice ATM) की शुरुआत कर बेसहारा लोगों के लिए खाने-पीने की ज़रुरी चीज़े उपलब्ध करवा रहे हैं। रामू की कोशिश है कि किसी भी व्यक्ति को भूखे पेट न रहना पड़े, जिसके लिए वह जरूरतमंद लोगों की मदद करने का हर संभव प्रयास करते हैं।

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चौबीसों घण्टे खुला रहता है राइस एटीएम

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के रिपोर्ट के अनुसार रामू दोसपाटी का राइस एटीएम (Rice ATM) दिन-रात हर समय खुले रहता है। यदि किसी भी व्यक्ति को खाने-पीने से संबंधित किसी चीज़ की ज़रुरत हो तो वह एलबी नगर स्थित रामू के घर जाकर राशन किट और ग्रोसरी की अन्य चीज़ें लेे सकता है।

15 हजार लोगों की कर चुके हैं मदद

रामू दोसपाटी पिछ्ले 6 महीनों से हर दिन जरूरतमंदों में राशन किट बांट रहे हैं। रामू के घर के सामने एक राशन की दुकान पर चावल लेने के लिए हर समय लोगों की लंबी लाइन लगी रहती है। रामू अबतक अपने पास से 5 लाख से भी ज़्यादा रूपए खर्च कर लगभग 15000 लोगों की मदद कर चुके हैं। लोगों ने भी रामू का पूरा साथ दिया जिससे रामू के लिए यह कार्य आसान होता गया।

कैसे आईं लोगों के मदद कि प्रेरणा ?

एक रिपोर्ट के अनुसार रामू ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले एक इंसान को भूखे मजदूरों की 2 हजार रूपए से मदद करते देखा। उस गार्ड की सैलरी 6 हजार से भी कम थी। तब ही रामू ने सोचा इतना कम कमाने वाला एक चौकीदार जब जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकता है तब मैं और मेरे जैसे लोग क्यों नहीं कर सकते। तभी से रामू के मन में सेवा भाव की भावना जागृत हुईं।

The Logically, Ramu Dosapati द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करता है। साथ ही अपने पाठकों से जरूरतमंद लोगों के मदद करने की अपील करता है, ताकि किसी भी बेसहारे को भूखे पेट न सोना पड़े।