Wednesday, August 4, 2021

देहरादून में दिखा ऐतिहासिक नज़ारा, 10 हज़ार पेड़ों की कटाई रोकने के लिए हजारों लोग सड़क पर उतरे: चिपको आंदोलन

पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों की कटाई के लिए आज से नहीं बल्कि लम्बे अरसे से कार्य चल रहा है। पहले भी लोग पेड़ों की कटाई का विरोध किया करते थे। 1973 में भी उत्तराखंड में वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए वहां की महिलाओं ने अपने कदम आगे बढ़ाए और चिपको आंदोलन किया। इस बार पुनः पेड़ों की रक्षा के लिए 10 हजार व्यति सामने आए हैं। थानो, देहरादून, ऋषिकेश, भानियावाला के स्थानीय लोग 10,000 से अधिक पेड़ों की कटाई का विरोध करने के लिए सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा हुए और रक्षासूत्र बांध पेड़ों की रक्षा का संकल्प लिया!

पेड़ो की कटाई पर रोक

देहरादून (Dehradun) में ऐतिहासिक ‘चिपको आंदोलन’ का एक और नजारा रविवार को देखा गया। यहां सैकड़ों लोग हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 10,000 पेड़ों की कटाई का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे। वहां सभी कार्यकर्ता और पर्यावरणविद इस कदम से चिंतित हैं क्योंकि देहरादून वन प्रभाग के थानो रेंज (Thano Range) में पेड़ों को काटने से हाथी, वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और जंगल के आसपास के क्षेत्रों में नदी का मार्ग बदल सकता है।

रक्षा सूत्र बांधकर लिया संकल्प

थानो (Thano) देहरादून (Dehradun) ऋषिकेश, भानियावाला के सैकड़ों स्थानीय लोग इकट्ठा हुए और रक्षासूत्र बांधकर पेड़ो की रक्षा का संकल्प लिया। इसके अलावा रक्षा सूत्र बांधने के बाद कुछ व्यक्तियों ने जंगलों की रक्षा पर नारे लगाए गए। एक प्रदर्शनकारी ने कहा थानो वन देहरादून के कार्बन और प्रदूषण सिंक के रूप में काम करता है, इसे प्रदूषण से मुक्त रखता है। इन सभी की चिंता योजनाओं को विकसित करने का एक तरीका ढूंढता है। जो आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक संसाधनों को महसूस करने और लाभान्वित करने की अनुमति देगा।

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सरकार से किया है विचार करने की अपील

देहरादून के निवासियों ने इस निर्णय पर सरकार से पुनर्विचार करने के लिए एक अभियान शुरू किया है। उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के साथ आने वाली समस्याओं पर कई विशेषज्ञ इशारा कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने भी सरकार पर चिंता व्यक्त की कि वे पहाड़ी क्षेत्रों में मैदानी इलाकों की तरह विकास मॉडल की नकल करना चाहते हैं जो कार्य गलत है। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NWB) से एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को 243 एकड़ वन भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी मांगी है।

पेड़ों की रक्षा के लिए आगे आने के लिए सभी स्वजनों को The Logically सलाम करता है।

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