हमने अक्सर महसूस किया है, कही-सुनी बात पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है। वही बात अगर कोई अपने अनुभव से कहता है तो उस पर आसानी से भरोसा हो जाता है। यही बात खेती में भी है। जैसे हमें कोई कहता है कि खेती कैसे होती है? इससे किस तरह मुनाफा कमाना है तो हम अच्छी तरह उन्हें नहीं बता सकते। लेकिन यही बात अगर कोई किसान अपने अनुभव से कहता है तो दूसरे किसान भी उसके विधि को जानना, समझना और सीखना चाहते हैं।

खेती करना और इसके गुड़ को सीखकर दूसरों को बताना भी एक हुनर है। खेती कई पद्धतियों को अपनाकर किया जाता है। आज की यह कहानी मिश्रित खेती पर है। जिस खेती से 12 हज़ार खर्च कर 50 हजार का लाभ हमारे किसान कमा रहें हैं। आइये उस किसान की कहानी को पढ़ते हैं जो ऐसे खेती कर रहें हैं।

मिश्रित खेती से सुरेन्द्र प्रसाद ने किसानों के बीच बना ली है अपनी अलग पहचान

सुरेन्द्र प्रसाद (Surendra Prasad) जो की पहलेजा दियारे (Pahaleza Diyare) इलाके से ताल्लुक रखतें हैं। यह मिश्रित खेती कर रहें हैं और अन्य किसानों को भी इस विधि से खेती करने की सलाह देते हैं। इन्होंने मिश्रित खेती कर सभी किसानों के बीच अपनी एक अनोखी पहचान बनाई है। इन्होंने इस खेती से 3 माह में 50 हज़ार का लाभ कमाया है। इनकी सफलता देख सभी किसान इस खेती के लिए जागरूक हो रहें और यह सीखने के लिए उत्सुक भी हैं।


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एक साथ अन्य कई फसल लगाकर 3 माह में 4 गुना फायदा कमाते हैं

सुरेन्द्र ने अपनी मिश्रित खेती में पालक, मटर और मूली लगाएं हैं। यह सराहनीय बात है कि 12 हज़ार लगाकर 3 माह में 4 गुना फायदा यानि 50 हज़ार रुपये की कमाई। शुरूआत में इन्होंने अपने 1 कट्ठा भूमि में 5 क्विंटल मूली को उगाया और इसे 5-20 रुपये किलो के हिसाब से बेचा। इस सफलता के बाद इन्होंने 3 क्विंटल और 5 क्विंटल अधिक उगाये। इस तरह इन्हें कम वक्त में, कम खर्च में अधिक लाभ हुआ।

उगाया 40 क्विंटल मटर

मूली की खेती सफल हुई तब इन्होंने मटर लगाने का निश्चय किया और खेतों में 10 प्रकार की मटर जीएस उगाये। इस खेती से भी सुरेन्द्र को अधिक लाभ यानि 40 किलो का उत्पादन हुआ जिसकी 25 रुपये 1 किलोग्राम के हिसाब से बिक्री हुई। इन्होंने बताया कि कोई भी किसान अपनी मेहनत से यह खेती कर सकता है और मुनाफा कमा सकता है।

खेतों के किनारे कंटीले तार को लगाया है ताकि मवेशियों से बचाव हो सके

खेती में सबसे बड़ी समस्या है नीलगाय और जंगली सुअर की। ये जानवर फसलों को खेतों में अपना आहार बनाकर सेवन कर लेते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए यह अपने पूरे खेत को कंटीले तार से घेर दियें हैं ताकि जानवर इसे नष्ट ना करें। यह कंटीले तार कुछ इस तरह हैं कि अधिक वर्षों तक यह ऐसे ही रहेंगें जिससे खेतो में अन्न की उपज अच्छी होगी। अपनी इस खेती से इन्हें एक फायदा यह भी है कि अगर अधिक वर्षा भी हो तो इनके खेतो में 4 में से 3 फसल आराम से निकल जाते हैं।

मार्केट है दूरी पर

सुरेन्द को थोड़ी दिक्कत होती है क्योंकि इन्हें अपने मटर और मूली सहित फसलों को बेचने के लिए 20-25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। यानि पहलेजा से पटना और दानापुर मॉर्केट दूर है। यह चाहते है कि सरकार बाज़ार को इनके गांव या पड़ोस में करा दे ताकि कम दूरी तय करनी पड़े और अधिक लाभ हो सके।

वैसे तो किसान सलाहकार और अन्य ग्राम पंचायत समिति जैविक खेती और मिश्रित खेती की सलाह देते हैं। लेकिन अगर यही कोई किसान अपनाकर उन्हें दूसरों को बताये तो यह कार्य सफल भी होता है। मिश्रित खेती के माध्यम से अधिक फसल उगाने और लाभ कमाने लिए The Logically, Surendra Prasad की प्रशंसा करता है।

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