Monday, November 30, 2020

असहायों की मदद के लिए बाइक को बना दिया एम्बुलेंस, बनारस की तंग गलियों में फ्री सर्विस दे रहा है यह युवा

आजकल ऐसे बहुत ही कम लोग देखने को मिलते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सहायता करें। आज की कहानी ऐसे ही युवक अमन यादव की है जो दिन रात का फर्क भुलाकर बनारस की गलियों में लोगों की मदद कर रहे हैं। अमन यादव (Aman yadav) बनारस के रहने वाले हैं। आज पूरा बनारस अमन को जानता है और उनके काम की सराहना करता है। जब भी बनारस में कहीं भी किसी भी गली में जहां पर एंबुलेंस पहुंचने की सुविधा नहीं है वहाँ अमन पहुंचकर लोगों तक सहायता पहुंचाते हैं।

इस नेक काम के पीछे की कहानी

अमन का यह सफर शुरू होने के पीछे की एक कहानी है। अमन बताते हैं कि एक बार किसी काम से वह सरकारी अस्पताल में गए थे जहां की स्थिति बहुत ही दयनीय थी। वहां पर मरीजो को किसी प्रकार की सुविधा नहीं थी। अस्पताल के बाहर एक बुजुर्ग महिला बेहोश पड़ी थी। अमन ने किसी तरह से उनके बेटों का नंबर पता कर उनसे संपर्क किया पर उस बूढ़ी महिला के पांच बेटों में से किसी ने भी उन्हें नही पहचाना । तब अमन ने उस महिला की देखभाल की जिम्मेदारी ली पर वह उस बुजुर्ग महिला को बचा नहीं सके। महिला की पोस्टमार्टम के बाद उनके बेटे उनकी हाथ की अंगूठी और सोने की चैन लेने को हाजिर हो गए। इस घटना ने अमन को अंदर तक झकझोर दिया और तब अमन ने यह निश्चय किया कि वह किसी भी हाल में लोगों तक मदद पहुंचाएंगे और तब से उनका यह नेक सफर शुरू हो गया।

aman helps poor patient

अमन यादव की मिनी एम्बुलेंस

2013 में अमन पैदल ही लोगों की मदद किया करते थे। लोग उन्हें उस समय जानने लगे थे, उनके काम को पहचाने लगे थे। इसलिए जब भी जरूरत पड़ती तो लोग उन्हें खुद कॉल करके बुलाते थे। फिर 2015 में शहर के एक व्यवसायी राजीव वर्मा ने अमन को सेकंड हैंड बाइक दी। उस बाइक को अमन ने मिनी एंबुलेंस में तब्दील कर लिया और उसमें सारी जरूरत की दवाइयां, मरहम-पट्टी जैसी ज़रूरी चीज़ें रख ली। अपने इस फर्स्ट एड बॉक्स की सहायता से वह सबसे पहले लोगों को प्राथमिक उपचार देते उसके बाद अपनी मिनी एंबुलेंस पर बैठाकर वह लोगों को अस्पताल तक पहुंचाते हैं।

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लॉकडाउन में भी की लोगो की मदद

कोरोना काल में जहां पूरी दुनिया अपने घर में बन्द थी, उस समय भी अमन ने लोगों तक पहुंच कर उन्हें मदद पहुंचाई है। अमन लॉकडाउन के समय लोगों तक दवाइयां पहुंचाने का भी काम करते थे। बहुत बार लोग उन्हें दवाइयों के दाम से ज्यादा पैसे देने की कोशिश करते हैं पर अमन यह कहते हुए मना कर देते है कि सेवा करना उनका फर्ज है और इससे उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती हैं।

helps patient

पांच साल पहले पिता का निधन हुआ

अमन की मां बताती है कि उन्हें अपने बेटे पर बहुत ही गर्व है। 5 साल पहले उनके पिता का निधन हो गया था पर उनका यह बहादुर बेटा कभी किसी भी परिस्थिति में टूटा नहीं बल्कि और मजबूत होकर लोगों की मदद करता है।

अमन यादव बनारस के लोगो के लिए अब अमन कबीर हैं

अमन यादव(Aman yadav) को बनारस के लोग अमन कबीर के नाम से जानते हैं । यह नाम उन्हें बनारस के ही एक थाना के थाना प्रभारी आशुतोष तिवारी ने दिया है। आशुतोष तिवारी ने अमन कबीर नाम देते हुए कहा था कि तुम निस्वार्थ भाव से लोगों की सहायता करते हो आज से तुम्हारा नाम अमन कबीर (Aman kabir)है और आज पूरा बनारस अमन यादव को इसी नाम से जानता है।

 turns bike into ambulance

अमन कहते हैं कि आज की युवा पीढ़ी ही नहीं हर बल्कि हर किसी को लोगों की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए और वह भी बिना किसी स्वार्थ के

अगर आप भी अमन कबीर से संपर्क करना चाहते है तो 8687553080 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

मृणालिनी सिंह
मृणालिनी बिहार के छपरा की रहने वाली हैं। अपने पढाई के साथ-साथ मृणालिनी समाजिक मुद्दों से सरोकार रखती हैं और उनके बारे में अनेकों माध्यम से अपने विचार रखने की कोशिश करती हैं। अपने लेखनी के माध्यम से यह युवा लेखिका, समाजिक परिवेश में सकारात्मक भाव लाने की कोशिश करती हैं।

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