Wednesday, December 13, 2023

20 वर्ष की आयु में चली गई आंखों की रौशनी, अब UPSC की परीक्षा में ऑल इंडिया 7 वीं रैंक हासिल कर बने IAS

किसी ने बेहद खुबसूरत बात कही है, “मंजिल कितनी भी दूर हो कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों से निकलने वाली नदी कभी किसी से सागर का रास्ता नहीं पुछती।”

उपर्युक्त कथन का ताजा उदाहरण है UPSC की परीक्षा में ऑल इण्डिया 7वीं रैंक हासिल करने वाले सम्यक जैन (Samyak Jain), जिन्होंने आंखों से दिखाई नहीं देने के बावजूद भी अपनी कोशिश जारी रखी और कठिन परिश्रम से आज UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल करके प्रेरणा की नई मिसाल पेश की है।

सम्यक जैन का परिचय

सम्यक जैन (Samyak Jain) दिल्ली (Delhi) के रोहिणी नगर के रहनेवाले हैं। जब उनकी आयु महज 20 वर्ष की थी तभी से उनके आंखों रौशनी जाने लगी और समय बीतने के साथ-साथ उन्हें दिखाई देना बंद हो गया। दृष्टिबाधित होने के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानकर आगे बढ़ने का फैसला किया और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एसओएल से इंग्लिश ऑनर्स से स्नातक की पढ़ाई की। उसके बाद उन्होंने IIMC से इंग्लिश जर्नलिज्म का कोर्स पूरा किए फिर JNU से इन्टरनेशनल रिलेशन में MA की पढ़ाई पूरी की।

Success story of Samyak Jain, who secured All India 7th rank in UPSC exam.

दूसरे प्रयास में मिली सफाल्ता

सम्यक जैन ने वर्ष 2020 में UPSC की परीक्षा दी थी जिसमें उन्हें असफलता हाथ लगी। लेकिन औरों की तरह उन्होंने निराश न होकर दृढ़निश्चय और हौसले के साथ फिर से जोरदार तैयारी करने में जुट गए। उन्होंने अपना दूसरा प्रयास साल 2021 में दिया। इस बार उनकी कठिन मेहनत रंग लाई और ऑल इण्डिया 7 वीं रैंक लाकर उन्होंने सफलता का परचम लहरा दिया।

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सोच से अधिक मिला

यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुए 685 उम्मीदवारों में से एक नाम अपना देखकर सम्यक काफी खुश हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि, सिंगल डिजिट में खुद का रिजल्ट देखकर वे काफी खुश हैं। इतना अच्छा परिणाम आने के बारें में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। वह आगे कहते हैं कि, उन्हें इस परीक्षा में सोच से कहिं अधिक मिला है और वे इतने खुश हैं कि अपनी भावनाओं को शब्दों में जाहिर करना संभव नहीं है।

माँ और दोस्त ने दिया साथ

सम्यक अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ को देते हैं। उन्होंने बताया कि, दृष्टिबाधित होने के कारण उन्हें प्रश्नों का उत्तर लिखने के लिए राइटर की जरुरत थी, जिसकी पूर्ति उनकी मां वन्दना जैन ने की। UPSC की परीक्षा तीन चरणों में होती है, प्रिलिम्स (Prelims), मेन्स (Mains) और इंटरव्यू (Interview)। प्रिलिम्स की परीक्षा में उत्तर देने के लिए उनकी मां ने मदद की तो वहीं मेन्स आन्सर राइटिंग के पेपर उनकी दोस्त ने लिखा।

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परिवार और दोस्तों के समर्थन के बिना संभव नहीं था मंजिल को पाना

वह बताते हैं कि, परिवार के साथ-साथ उनके दोस्तों ने भी उनकी काफी मदद की। परीक्षा की तैयारी अच्छी तरीके से हो सके इसके लिए उनके दोस्तों ने डिजिटल फॉर्मेट में किताबों की व्यव्स्था की। उनका कहना है कि, परिवार और दोस्तों के बिना इस मुकाम तक पहुंच पाना सरल नहीं था, उनके साथ के बदौलत ही आज वे इतनी खुबसूरत मंजिल तक पहुंच पाए हैं।

लॉकडाउन का उठाया फायदा

जैसा कि आप जानते हैं कोरोना की लहर ने अनेकों लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी थी तो वहीं कुछ लोगों के लिए ये समय भी वरदान बनकर आया था। सम्यक ने भी कोरोना लॉकडाउन में उन्हें तैयारी करने का एक बेहतर मौका मिला, जिसका उन्होंने भरपूर फायदा उठाया। मार्च 2020 के दौरान कोरोना महामारी के वजह से कॉलेज बन्द हो चुके थे। ऐसे में UPSC परीक्षा की तैयारी ऑनलाइन करनी शुरु की, जिसके लिए उन्हें 7-8 घन्टे आसानी से मिल जाते थे।

प्रेरणा

सम्यक जैन (IAS Samyak Jain) ने UPSC में ऑल इण्डिया 7 वीं रैंक हासिल करके उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल पेश की है, जो बहुत जल्द ही हिम्मत हार कर बैठ जाते हैं। उन्होंने साबित कर दिखाया है कि यदि दृढ़ निश्चय और कठिन परिश्रम से किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।