Saturday, December 3, 2022

टैक्सी ड्राइवर की बेटी ने दिव्यान्गता को मात देकर NEET की परीक्षा में हासिल की सफलता, अब बनेगी डॉक्टर: प्रेरणा

शारीरिक रुप से असक्षम होने के कारण अधिकांश लोग अपने आप को दूसरों के मुकाबले कमतर आंकते हैं साथ ही उनमें आत्मविश्वास की भी कमी रहती हैं। लेकिन ठीक इसके विपरीत कुछ ऐसे भी लोग हैं जो शारीरिक अक्षमता को अपनी कमी न मानकर उसे अपनी मजबूती बनाते हैं बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर लेते हैं।

यशी कुमारी (Yashi Kumari) ने उपर्युक्त कथन को एक बार फिर से सही साबित कर दिखाया है। शरीर से दिव्यांग होने के बावजूद भी उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया और NEET की परीक्षा में सफलता हासिल करके डॉक्टर बनने के सपने को हकीकत में बदला। इतना ही नहीं NEET में कामयाबी हासिल करके यशी ने शारीरिक कमजोरियों को अपनी कमी मानने वालों के लिए प्रेरणा की मिसाल भी पेश की है।

इसी कड़ी में चलिए जानते हैं यशी कुमारी (Yashi Kumari) के प्रेरणादायक सफर के बारें में कि कैसे उन्होंने शारीरिक कमजोरियों को अपनी मजबूती बनाकर इस मुकाम को हासिल किया है।

यशी कुमारी का परिचय

यशी कुमारी (Yashi Kumari) गोरखपुर (Gorakhpur) के झुनिया तहसील के मुंडरा गांव के एक बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता का नाम मनोज कुमार सिंह हैं और वह अपने परिवार का जीवनयापन करने के लिए टैक्सी चलाते हैं। यशी दो बहन और एक भाई हैं जिसमें से वह बीच की हैं और सेरेबल पाल्सी (Cerebral palsy) नामक बीमारी से पीड़ित हैं।

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यशी कुमारी की शिक्षा

महंगाई के इस दौर में टैक्सी चलाकर मामूली कमाई से घर चलाना और परिवार की जरूरतों को पूरा करना बहुत मुश्किल होता है लेकिन फिर भी यशी के पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई कमी नहीं की। यशी ने गोरखपुर स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बार रिलायंस एकेडमी से इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद उनके पिता ने NEET की तैयारी करने के लिए राजस्थान के कोटा भेज दिया जहां रहकर यशी ने इस परीक्षा की तैयारी की।

बचपन से ही था डॉक्टर बनने का सपना

सेरेबल पाल्सी नामक बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद भी यशी ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और हमेशा साकारात्म्क सोच के साथ खड़ी रहीं। आमतौर पर अधिकांश लोग अपनी दिव्यान्गता के कारण कुछ बड़ा करने का सपना नहीं देखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वह उसे पूरा नहीं कर पाएंगे। लेकिन यशी उनलोगों से अलग हैं। वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं और उन्होंने इस सपने को साकार भी कर लिया है।

दाहिना हाथ और पैर से हैं विकलांग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यशी का दायां हाथ और पैर काम नहीं करता है या यूँ कहें तो वह इन अंगों से अपाहिज हैं। हाथ और पैर अपाहिज होने के कारण यशी न तो सही से चलने में सक्षम हैं और न ही दाहिने हाथ से किसी काम को करने के काबिल हैं। अधिकांश लोग लिखने के लिए दाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं और उनके लिए बाएं हाथ से लिखना एक मुश्किल टास्क होता है।

यशी के साथ भी यही दिक्कत थी, उन्हें बाएं हाथ से लिखने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दाहिना हाथ बेकार होने के कारण यशी ने बाएं हाथ से लिखने और अन्य कार्यों के लिए अक्सर अभ्यास करती रहती थीं ताकि उन्हें लिखने या कोई और काम करने में दिक्कत न हो।

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लोगों ने दिया ताना लेकिन नहीं मानी हार

अक्सर हम और आप देखते हैं कि लोग एक-दूसरें का मजाक बनाने से पीछे नहीं हटते हैं, वे अक्सर लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के बजाय पीछे धकेलते हैं। यशी के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनके अपाहिज होने के कारण लोगों ने उनका मजाक, उन्हें ताना मारा। लेकिन यशी ने किसी की भी बातों पर ध्यान नहीं दिया और सभी के ऐसी बेफिजूल की बातों को अनसुना करके अपनी पढाई पर फोकस रखा। परिणामस्वरुप आज वह NEET परीक्षा में सफलता हासिल करके सभी के लिए मिसाल पेश की हैं।

दिमाग पर है नियंत्रण

अपनी इस अपार सफलता के बारें में बताते हुए यशी कहती हैं कि, उनका हाथ-पैर बेसक अपाहिज है लेकिन उनका दिमाग अपाहिज नहीं है। उनके दिमाग पर उनका पूरा नियंत्रण है। वह कहती हैं कि सब दिमाग का खेल है यदि दिमाग पर कंट्रोल है और वह सही से काम कर रहा है उन्हें आगे बढ़ने और कुछ करने से कोई भी नहीं रोक सकता है।

यशी के पिता ने कही यह बात…

यशी (Yashi Kumari) के पिता अपनी बेटी की सफलता के बारें में बताते हुए कहते हैं कि एक टैक्सी ड्राइवर होने के नाते उनके लिए यह सब अकेले की बात नहीं थी। उनके बेटी की कोचिंग के लिए उनका इलाज करनेवाले डॉक्टर जितेन्द्र सहित अन्य लोगों ने भी काफी मदद की है। आज वह अपनी बेटी की इस सफलता से बेहद खुश हैं।

आमतौर पर जहां शारीरिक रुप से सक्षम लोग हार मान जाते हैं वहीं दिव्यांग होते हुए भी यशी ने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार NEET की परीक्षा में सफलता हासिल करके प्रेरणा की मिसाल पेश की है। The Logically उन्हें इस सफलता के लिए बधाई देता है।